आरबीआई की चेतावनी: पश्चिम एशिया में युद्ध से आर्थिक संकट की आशंका
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद की स्थिति
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण सप्लाई चेन में बाधा उत्पन्न हुई है। इसके परिणामस्वरूप, सभी को आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। बैंक ने भारत की आर्थिक विकास दर के पूर्वानुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है।
महंगाई की समस्या फिर से गंभीर हो गई है, और अर्थव्यवस्था के सकारात्मक पूर्वानुमान भी प्रभावित हो रहे हैं। आरबीआई ने यह भी बताया कि मुद्रास्फीति दर 5 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अर्थव्यवस्था के सामने खड़े पांच प्रमुख जोखिमों का उल्लेख किया।
आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और उसके प्रभाव
मल्होत्रा के अनुसार, होरमुज जलमार्ग में रुकावट के कारण कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, जिसका असर घरेलू उत्पादन पर पड़ेगा। खाड़ी क्षेत्र में संकट के कारण मालवाहक जहाजों को लंबे समुद्री मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे माल भाड़े और डिलिवरी समय में वृद्धि हुई है।
उन्होंने चेतावनी दी कि जो प्रारंभ में आपूर्ति में कमी समझी गई थी, वह मध्यम अवधि में मांग में कमी का कारण बन सकती है। आपूर्ति में बाधा के चलते वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे बाजार में उनकी मांग में कमी आएगी।
महंगाई की बढ़ती दर और कृषि पर प्रभाव
मार्च में एमएमसीजी कंपनियों की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि असली महंगाई आरबीआई के पूर्वानुमान से भी अधिक बढ़ सकती है। कच्चे तेल और अन्य इनपुट सामग्रियों की लागत में वृद्धि के कारण इन कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतें 7 से 8 प्रतिशत तक बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव जारी रहा, तो आने वाले महीनों में कीमतें 10 से 15 प्रतिशत तक और बढ़ सकती हैं।
आरबीआई ने यह भी चेतावनी दी है कि उर्वरकों की कमी से कृषि उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे खाद्य संकट उत्पन्न हो सकता है। आयात महंगा होने और पूंजी के बाहर जाने के कारण रुपया पहले से ही कमजोर हो रहा है। यह संकट गहरा है, और इसके समाधान के लिए सरकार के पास कोई स्पष्ट उपाय नहीं है।