इथेनॉल मिश्रित ईंधन: हरदीप पुरी ने दी सफाई, पूरी तरह सुरक्षित है
इथेनॉल ईंधन पर फैली अफवाहों का खंडन
केंद्र सरकार का इथेनॉल ईंधन को बढ़ावा देने का प्रयास
नई दिल्ली: केंद्र सरकार कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पेट्रोलियम उत्पादों के लिए विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल और डीजल के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। हालांकि, इस बीच कुछ अफवाहें भी फैल रही हैं कि इथेनॉल युक्त ईंधन से वाहनों के इंजन को नुकसान हो रहा है। इस पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्टीकरण दिया है।
अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि हाल के दिनों में बायोफ्यूल ब्लेंडिंग को लेकर सोशल मीडिया पर कई बातें सामने आई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार आलोचना का स्वागत करती है और यदि किसी को लगता है कि सरकार के कार्यों में कमी है, तो वे सुझाव दे सकते हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे तथ्यों और अफवाहों के बीच अंतर समझें। मंत्री ने कहा कि इथेनॉल के उपयोग से संबंधित दो प्रमुख अफवाहें हैं: पहली, इथेनॉल से ईंधन में कीड़े-मकोड़े पैदा होते हैं, और दूसरी, इथेनॉल मिश्रित ईंधन से इंजन खराब हो जाता है।
इथेनॉल का उपयोग पूरी तरह सुरक्षित
पुरी ने इन दावों को गलत बताते हुए कहा कि इथेनॉल का उपयोग एक पुरानी अवधारणा है, जिस पर लगभग एक सदी से काम हो रहा है। उन्होंने उदाहरण दिया कि फोर्ड मोटर कंपनी के संस्थापक हेनरी फोर्ड के समय में भी ऐसी कारें बनाई गई थीं जो बायोफ्यूल, केरोसिन और फॉसिल फ्यूल पर चल सकती थीं।
उन्होंने कहा कि यदि इथेनॉल वास्तव में इतना हानिकारक होता, तो दुनिया के कई देशों में दशकों से इसका सफलतापूर्वक उपयोग नहीं किया जाता।
भारत में बायोफ्यूल ब्लेंडिंग का इतिहास
मंत्री ने यह भी बताया कि भारत में बायोफ्यूल ब्लेंडिंग की पहल नई नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि इसकी शुरुआत कांग्रेस सरकार के समय हुई थी। उन्होंने ब्राजील में अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां इथेनॉल आधारित ईंधन का व्यापक उपयोग हो रहा था और भारत भी उसी दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
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