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कार के इंजन ऑयल की देखभाल: कब और कैसे करें बदलाव

इस लेख में कार के इंजन ऑयल की देखभाल के महत्व और इसे कब बदलना चाहिए, इस पर चर्चा की गई है। जानें कि शहर और हाईवे ड्राइविंग का ऑयल पर क्या प्रभाव पड़ता है, और कैसे सही समय पर बदलाव करके आप अपने इंजन की परफॉर्मेंस को बेहतर बना सकते हैं। साथ ही, ऑयल के खराब होने के संकेत और फिल्टर बदलने के महत्व पर भी जानकारी दी गई है।
 

इंजन ऑयल का महत्व


नई दिल्ली: कार का इंजन ऑयल केवल एक तरल पदार्थ नहीं है, बल्कि यह इंजन के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करता है। यह गर्मी को नियंत्रित करता है, भागों को चिकनाई प्रदान करता है और घिसाव से बचाता है। हर ऑयल की एक निश्चित उम्र होती है, और इसे समय पर बदलना इंजन की सेहत के लिए उतना ही आवश्यक है, जितना कि शरीर के लिए समय पर पानी पीना। यदि ऑयल बदलने में देरी की जाती है, तो यह इंजन की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है और मरम्मत के खर्च को बढ़ा सकता है।


ऑयल बदलने का सही समय

कार मालिक अक्सर पूछते हैं कि ऑयल कब बदलना चाहिए - महीने के हिसाब से या माइलेज के अनुसार? विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों का संतुलन आवश्यक है। शहर की भीड़, बार-बार रुकना और धूलभरी सड़कें ऑयल की गुणवत्ता को जल्दी प्रभावित करती हैं, जबकि हाईवे पर लंबी ड्राइव में ऑयल धीरे खराब होता है। इसलिए, अपनी ड्राइविंग की स्थिति को समझना ऑयल बदलने का सही समय तय करने में मदद करता है।


ऑयल के प्रकार और उनकी उम्र

इंजन ऑयल मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में आता है: मिनरल, सेमी-सिंथेटिक और फुल सिंथेटिक। मिनरल ऑयल को 5,000 किमी या 4-5 महीने में बदलना उचित होता है। सेमी-सिंथेटिक 7,000-8,000 किमी या 6 महीने तक चल सकता है, जबकि फुल सिंथेटिक ऑयल 10,000-12,000 किमी या 8-9 महीने तक प्रभावी रहता है। प्रीमियम कारें आमतौर पर सिंथेटिक ऑयल पर बेहतर प्रदर्शन करती हैं। सही ऑयल का चयन और समय पर बदलाव इंजन की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।


शहर बनाम हाईवे ड्राइव का प्रभाव

शहर में रोजाना की ड्राइविंग में कार को बार-बार रुकना और चलना पड़ता है, जिससे इंजन अधिक गर्म होता है और ऑयल तेजी से खराब होता है। ट्रैफिक में लंबे समय तक आइडलिंग करने से भी ऑयल की उम्र कम हो जाती है। इसके विपरीत, हाईवे पर इंजन स्थिर तापमान पर काम करता है, जिससे ऑयल धीरे खराब होता है। यदि कार ज्यादातर शहर में चलती है, तो माइलेज की निर्धारित सीमा से 1,000-2,000 किमी पहले ऑयल बदल देना समझदारी है।


ऑयल खराब होने के संकेत

कार का ऑयल खराब होने पर कई संकेत मिलते हैं, जैसे इंजन से हल्की खड़खड़ाहट, एक्सीलरेशन में देरी, माइलेज में कमी और डैशबोर्ड पर ऑयल वार्निंग लाइट का जलना। यदि ऑयल गाढ़ा, काला और जलने जैसी गंध वाला हो, तो यह बदलाव का स्पष्ट संकेत है। ठंड में इंजन स्टार्ट करते समय अधिक आवाज आना भी ऑयल के थकने का संकेत हो सकता है। इन संकेतों को जल्दी पहचानना इंजन को गंभीर नुकसान से बचा सकता है।


ऑयल फिल्टर का महत्व

ऑयल बदलते समय फिल्टर को बदलना भी अनिवार्य है। फिल्टर गंदगी और धातु के सूक्ष्म कणों को रोकता है। पुराना फिल्टर नए ऑयल को भी जल्दी खराब कर सकता है। यदि फिल्टर बंद हो जाए, तो ऑयल का सर्कुलेशन धीमा हो जाता है और इंजन के भागों को पर्याप्त चिकनाई नहीं मिलती। इसलिए, हर ऑयल चेंज के साथ नया फिल्टर लगाना इंजन की स्मूद कार्यक्षमता और सुरक्षा को लंबे समय तक बनाए रखता है।


कब तुरंत बदलाव करें?

यदि कार में ऑयल वार्निंग लाइट लगातार जल रही हो, इंजन ओवरहीट हो रहा हो या ऑयल बहुत कम हो गया हो, तो तुरंत बदलाव आवश्यक है। भारी ड्राइविंग, लंबी यात्रा, अत्यधिक धूल या खराब मौसम में भी ऑयल की जांच और जल्दी बदलाव करना चाहिए। समय पर ऑयल बदलने से इंजन का शोर कम होता है, परफॉर्मेंस स्मूद रहती है और माइलेज संतुलित रहता है। यह आदत कार की उम्र बढ़ाती है और अचानक ब्रेकडाउन से भी बचाती है।