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चीन ने गोबी रेगिस्तान में बनाया दुनिया का सबसे बड़ा लिक्विड एयर एनर्जी स्टोर

चीन ने गोबी रेगिस्तान में एक अद्वितीय लिक्विड एयर एनर्जी स्टोर का निर्माण किया है, जिसे 'सुपर कोल्ड एयर बैटरी' कहा जाता है। यह संयंत्र 6 लाख किलोवाट प्रति घंटे बिजली उत्पन्न करने में सक्षम है और लगभग 30 हजार घरों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करेगा। इसकी कार्यप्रणाली में हवा को तरल रूप में परिवर्तित किया जाता है, जिससे बिजली की मांग बढ़ने पर इसे उपयोग में लाया जा सके। यह तकनीक अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
 

चीन की नई ऊर्जा भंडारण तकनीक

बीजिंग: चीन ने ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति की है। किंगहाई प्रांत के गोलमुड शहर के निकट, गोबी रेगिस्तान में दुनिया का सबसे बड़ा 'लिक्विड एयर एनर्जी स्टोर' स्थापित किया जा रहा है। इसे 'सुपर कोल्ड एयर बैटरी' के नाम से जाना जाता है। यह परियोजना अपने आकार और अनोखी कार्यप्रणाली के कारण चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां विशाल सफेद टैंकों में हवा को उच्च दबाव में कंप्रेस किया जाता है और तापमान को माइनस 194 डिग्री सेल्सियस तक कम करके हवा को तरल रूप में परिवर्तित किया जाता है। जब बिजली की मांग बढ़ती है, तो इस लिक्विड हवा का उपयोग करके टरबाइन को घुमाकर बिजली उत्पन्न की जाएगी।


रिपोर्ट के अनुसार, इस विशाल 'सुपर एयर पावर बैंक' का निर्माण चाइना ग्रीन डेवलपमेंट इन्वेस्टमेंट ग्रुप ने चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के सहयोग से किया है। यह संयंत्र जल्द ही कार्यशील हो जाएगा। इसकी क्षमता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह एक बार में 6 लाख किलोवाट प्रति घंटे बिजली प्रदान कर सकता है और लगातार 10 घंटे तक कार्य कर सकता है। अनुमान है कि यह संयंत्र साल भर में लगभग 18 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन करेगा, जो लगभग 30 हजार घरों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।


इस संयंत्र की कार्यप्रणाली विज्ञान के अद्भुत सिद्धांतों पर आधारित है। सबसे पहले, बिजली का उपयोग करके हवा को साफ किया जाता है, फिर उसे दबाकर और ठंडा करके तरल रूप में बड़े टैंकों में संग्रहित किया जाता है। जब ग्रिड को बिजली की आवश्यकता होती है, तो इस लिक्विड हवा को गर्म किया जाता है। गर्म होने पर यह तेजी से गैस में बदल जाती है और फैलती है। इस तीव्र फैलाव की शक्ति से टरबाइन घूमते हैं और बिजली उत्पन्न होती है। इस प्रणाली को गोबी रेगिस्तान में स्थित 2.5 लाख किलोवॉट के सोलर फार्म से सीधे जोड़ा गया है, ताकि अक्षय ऊर्जा का सही उपयोग किया जा सके।


इस प्रकार के संयंत्र की आवश्यकता इसलिए महसूस की जा रही थी क्योंकि सूरज और हवा से मिलने वाली ऊर्जा हमेशा समान नहीं होती। मौसम के अनुसार इसमें उतार-चढ़ाव होता है, जिससे पावर ग्रिड की स्थिरता प्रभावित होती है। शोधकर्ता वांग जुनजी का कहना है कि सोलर और विंड पावर की अनिश्चितता के कारण सप्लाई और डिमांड में संतुलन बनाना कठिन होता है। यह नया संयंत्र अतिरिक्त बिजली को संग्रहित करेगा और जब धूप या हवा नहीं होगी, तब ग्रिड को बिजली देकर सप्लाई को सुचारू बनाए रखेगा। यह तकनीक भविष्य में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण परिवर्तन साबित हो सकती है।