थेवा आर्ट: मंदसौर के शिल्पकार ने पीएम मोदी के लिए बनाया विशेष ब्रोच
थेवा आर्ट की अंतरराष्ट्रीय पहचान
मंदसौर: राजस्थान के प्रतापगढ़ की प्रसिद्ध थेवा आर्ट अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। इस पारंपरिक कला को मध्य प्रदेश के मंदसौर के शिल्पकार राकेश सोनी ने पिछले 25 वर्षों से जीवित रखा है। उनकी मेहनत और कुशलता ने थेवा कला को एक नई पहचान दी है।
राकेश सोनी का शिल्प कौशल
राकेश सोनी ने बताया कि उन्होंने यह कला अपने मामा से सीखी, जो राजस्थान में रहते हैं और इस शिल्पकला में वर्षों से सक्रिय हैं। उन्होंने कठिन परिश्रम के बाद इस कला में महारत हासिल की है। उनके द्वारा बनाए गए थेवा आर्ट के आभूषण और कलाकृतियां देशभर में भेजी जाती हैं और कला प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं। थेवा कला की खासियत इसकी बारीक नक्काशी है, जिसमें रंगीन कांच की सतह पर 23 कैरेट सोने से बारीक डिजाइन बनाए जाते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की स्लोवाकिया यात्रा
हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्लोवाकिया यात्रा के दौरान थेवा कला को वैश्विक पहचान मिली। उन्होंने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को थेवा मोटिफ कफलिंक्स भेंट किए, जो इस कला की बारीकियों को दर्शाते हैं।
वोकल फॉर लोकल का प्रभाव
पीएम मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' अभियान से प्रेरित होकर, राकेश सोनी ने प्रधानमंत्री के लिए एक विशेष ब्रोच तैयार किया है। इस ब्रोच में थेवा कला की पारंपरिक विशेषताएं और भारतीय संस्कृति की झलक शामिल है। राकेश सोनी चाहते हैं कि यह उपहार प्रधानमंत्री तक पहुंचे, ताकि वे उनकी कला और समर्पण को समझ सकें।
थेवा कला का महत्व
राकेश सोनी ने कहा, "मैं पिछले 25 वर्षों से इस कला को आगे बढ़ा रहा हूं। इसमें बहुत बारीकी का काम होता है और एक सेट तैयार करने में लगभग तीन दिन लगते हैं। यह कला लगभग 400 साल पुरानी है और मुगल काल से चली आ रही है।" उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने थेवा कला को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई है।
संस्कृति की अनमोल पहचान
थेवा आर्ट, जो राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की लगभग 400 वर्ष पुरानी हस्तकला है, अब भारतीय सांस्कृतिक विरासत का एक अनमोल हिस्सा बन चुकी है। इस कला में बहुरंगी कांच की सतह पर 23 कैरेट सोने की बारीक नक्काशी की जाती है।