पंजाब को रक्षा निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में कदम
पंजाब की रक्षा में योगदान
कहा, देश की आबादी का मात्र 2 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद सेना में राज्य का योगदान 12 प्रतिशत से अधिक
चंडीगढ़ में आयोजित एक उच्च-स्तरीय डिफेंस स्किल्स कनक्लेव के दौरान, पंजाब सरकार ने राज्य को भारत के रक्षा निर्माण क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस सम्मेलन का उद्देश्य रक्षा, एयरोस्पेस और रणनीतिक क्षेत्रों में कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करना था। रोजगार उत्पत्ति, कौशल विकास और प्रशिक्षण मंत्री अमन अरोड़ा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम ने आत्मनिर्भरता की दिशा में राज्य की भूमिका को उजागर किया।
सम्मेलन का उद्देश्य
इस सम्मेलन का मुख्य लक्ष्य एक ऐसा उद्योग-अनुकूल कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना था, जो आधुनिक युद्ध और एयरोस्पेस से संबंधित तकनीकी मांगों को पूरा कर सके। इसमें रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा, और प्रमुख उद्योगपति शामिल हुए।
पंजाब का ऐतिहासिक योगदान
अमन अरोड़ा ने मुगल युग से लेकर वर्तमान तक पंजाब के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध तकनीकों के संदर्भ में बहादुरी को अत्याधुनिक कौशल से लैस करना आवश्यक है। यह सम्मेलन पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि राज्य न केवल सैनिकों का उत्पादन करे, बल्कि कुशल तकनीशियनों और इंजीनियरों को भी तैयार करे।
उन्होंने बताया कि पंजाब की जनसंख्या केवल 2 प्रतिशत है, लेकिन सेना में इसका योगदान 12 प्रतिशत से अधिक है। राज्य में रक्षा उद्योग में निवेश आकर्षित करने की अपार संभावनाएं हैं।