पेट्रोल, डीजल और CNG: नई कार खरीदने के लिए सही विकल्प कैसे चुनें
नई दिल्ली में कार खरीदने की चुनौती
नई दिल्ली: नई कार खरीदने का सपना हर किसी का होता है, लेकिन असली चुनौती तब शुरू होती है जब पेट्रोल, डीजल और CNG में से किसी एक का चयन करना होता है। कई लोग केवल माइलेज के आधार पर निर्णय लेते हैं, लेकिन यह निर्णय बाद में हर महीने उनके बजट पर भारी पड़ सकता है। इसलिए, अब लोग सही गणना के साथ कार खरीदने की सोच रहे हैं।
ईंधन के विकल्पों के फायदे और नुकसान
ऑटो विशेषज्ञों का मानना है कि हर ईंधन विकल्प के अपने फायदे और नुकसान हैं। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी ड्राइविंग कितनी है, सड़कें कैसी हैं और आप कार को कितने साल तक इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं। सही जानकारी के बिना निर्णय लेना महंगा साबित हो सकता है।
लंबी दूरी के लिए कौन सा ईंधन बेहतर है?
पेट्रोल कारें पहली नजर में सस्ती लग सकती हैं, लेकिन लंबी दूरी की यात्रा में डीजल कार से काफी बचत हो सकती है। वहीं, सीएनजी कार का परिचालन खर्च सबसे कम होता है।
माइलेज और ईंधन की कीमतें
नई कार खरीदना हमेशा से ही एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। लेकिन पेट्रोल, डीजल और CNG में से चुनाव करना और भी कठिन हो जाता है। कई खरीदार केवल माइलेज और ईंधन की कीमतों पर ध्यान देते हैं। असल में, सही उत्तर इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितनी दूरी तय करते हैं, कहां ड्राइव करते हैं और कार को कितने समय तक रखने की योजना बना रहे हैं। आइए इसे सरल गणित से समझते हैं।
कम चलने वाली कारों के लिए सर्वोत्तम विकल्प
यदि आपकी मासिक ड्राइविंग 1,000 किमी से कम है, तो पेट्रोल सबसे उपयुक्त विकल्प है। भले ही ईंधन महंगा हो, लेकिन कम खरीद लागत इसे संतुलित रखती है।
उदाहरण के लिए, यदि एक पेट्रोल हैचबैक 18 किमी प्रति लीटर का माइलेज देती है और पेट्रोल की कीमत लगभग 100 रुपये प्रति लीटर है, तो चलने की लागत लगभग 5.5 रुपये प्रति किलोमीटर होती है।
डीजल कारें: लंबी यात्रा के लिए बेहतरीन
डीजल कारें महंगी होती हैं, लेकिन बेहतर माइलेज और दमदार टॉर्क प्रदान करती हैं। यही कारण है कि ये लंबी हाइवे यात्राओं के लिए आदर्श हैं। मान लीजिए एक डीजल एसयूवी 22 किमी प्रति लीटर का माइलेज देती है और डीजल की कीमत 90 रुपये प्रति लीटर है, तो चलने का खर्च घटकर लगभग 4 रुपये प्रति किलोमीटर हो जाता है।
यह अंतर भले ही बहुत बड़ा न लगे, लेकिन हर साल 20,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने पर बचत काफी बढ़ जाती है। डीजल कारें मुख्य रूप से उन लोगों के लिए उपयुक्त हैं जो नियमित रूप से लंबी दूरी की यात्रा करते हैं।
सीएनजी कारें: सबसे सस्ती विकल्प
भारत में सीएनजी कारें तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण कम परिचालन लागत है। यदि एक सीएनजी कार लगभग 28 किमी/किलो का माइलेज देती है और सीएनजी की कीमत 75 रुपये प्रति किलो है, तो परिचालन लागत लगभग 2.7 रुपये प्रति किलोमीटर रह जाती है। यह पेट्रोल कारों की तुलना में लगभग आधी है।
हालांकि, फैक्ट्री-फिटेड सीएनजी मॉडल की कीमत पेट्रोल वर्जन से 80,000 रुपये से 1 लाख रुपये अधिक हो सकती है, लेकिन ईंधन की कीमतों और उपयोग के आधार पर 35,000-45,000 किलोमीटर के भीतर ही ब्रेक-ईवन पॉइंट तक पहुंचा जा सकता है।
लेकिन कुछ कमियां भी हैं। परफॉर्मेंस थोड़ी कमजोर लगती है। सिलेंडर की वजह से बूट स्पेस कम हो जाता है। साथ ही, हर जगह पेट्रोल पंप आसानी से उपलब्ध नहीं होते।
आपको कौन सा विकल्प चुनना चाहिए?
यदि आपकी गाड़ी का इस्तेमाल कम होता है और आप ज्यादातर शहर में ही गाड़ी चलाते हैं, तो पेट्रोल चुनें। अगर आप नियमित रूप से लंबी दूरी तय करते हैं, तो डीज़ल चुनें। यदि ईंधन पर पैसे बचाना आपकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है, तो सीएनजी का चयन करें.