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पोलाची के नारियल निर्यात में विदेशी मांग से सुधार, लेकिन ढुलाई लागत बनी चुनौती

पोलाची, तमिलनाडु से नारियल निर्यात में विदेशी मांग में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, जिससे किसानों और निर्यातकों को राहत मिली है। हालांकि, ढुलाई लागत में वृद्धि और पानी की कमी जैसी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। पिछले कुछ महीनों में निर्यात में गिरावट आई थी, लेकिन अब स्थिति में सुधार हो रहा है। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में निर्यात सामान्य हो जाएगा, जबकि अगले साल की फसल को लेकर चिंताएँ भी सामने आ रही हैं।
 

नारियल निर्यात में तेजी के संकेत

कोयंबटूर : तमिलनाडु के प्रमुख नारियल उत्पादन क्षेत्र पोलाची से नारियल के निर्यात में फिर से सुधार के संकेत मिल रहे हैं। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव में कमी और खाड़ी देशों से बढ़ती मांग ने किसानों और निर्यातकों को राहत दी है। पिछले कुछ महीनों से व्यापार प्रभावित था, लेकिन अब स्थिति में सुधार हो रहा है।


खाड़ी देशों से नई मांग

खाड़ी देशों के मुख्य बाजारों से नारियल निर्यात के लिए नई पूछताछ शुरू हो गई है। इससे विदेशी व्यापार फिर से सक्रिय हो रहा है, जो पहले पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण लगभग ठप हो गया था।


पोलाची का निर्यात प्रभावित

पोलाची से बड़ी मात्रा में नारियल खाड़ी देशों में निर्यात किया जाता है। हालाँकि, पिछले तीन महीनों में निर्यात में भारी गिरावट आई, जिससे व्यापारियों और किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।


चुनौतियाँ बनी हुई हैं

हालांकि, नारियल का निर्यात फिर से शुरू हो गया है, लेकिन इस क्षेत्र के सामने कई चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। संघर्ष के दौरान माल ढुलाई का किराया काफी बढ़ गया था। अब इसमें कुछ कमी आई है, लेकिन यह अभी भी सामान्य से अधिक है।


निर्यातकों को नुकसान

शिपिंग लागत में वृद्धि और माल की ढुलाई में देरी के कारण निर्यातकों को भारी नुकसान हुआ। कई खेपें अपने गंतव्य तक पहुँचने से पहले ही खराब हो गईं।


उम्मीदें बनी हुई हैं

इंडस्ट्री से जुड़े लोग आशा कर रहे हैं कि मांग में वृद्धि के साथ आने वाले हफ्तों में नारियल का निर्यात धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगा।


बंदरगाह से निर्यात में रुकावट

इस रुकावट से पहले, पोलाची के निर्यातक कोच्चि बंदरगाह के माध्यम से प्रतिदिन नारियल से भरे कई कंटेनर खाड़ी देशों में भेजते थे। लेकिन पिछले तीन महीनों में बंदरगाह से निर्यात का काम लगभग ठप रहा।


घरेलू बाजार में बढ़ी सप्लाई

निर्यात लंबे समय तक बंद रहने से घरेलू बाजार में नारियल की सप्लाई बढ़ गई, जिससे कीमतों में भारी गिरावट आई। पिछले साल इसी समय नारियल का भाव लगभग 65,000 रुपये प्रति टन था, जो अब घटकर लगभग 40,000 रुपये प्रति टन रह गया है।


बंपर पैदावार का असर

इस साल बंपर पैदावार से बाजार में नारियल की आवक बढ़ गई, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ा। हालाँकि, मजदूरों की कमी के कारण कीमतें इससे ज्यादा नहीं गिरीं। प्रवासी मजदूरों की कमी ने नारियल तोड़ने और छीलने के काम को प्रभावित किया है।


किसानों की उम्मीदें

किसानों को उम्मीद है कि कटाई का मौसम खत्म होने से पहले, अगले दो महीनों में अधिक पैदावार होगी।


भविष्य की चिंताएँ

हालांकि, अगले साल की फसल को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। इस साल सामान्य से कम बारिश और सूखे जैसे हालात बनने से आने वाले सीजन में पैदावार घटने का डर है, जिससे आगे चलकर कीमतें बढ़ सकती हैं।


पानी की कमी की चुनौती

पानी की कमी भी किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। कम बारिश के कारण भूजल स्तर गिर गया है। कई किसान नारियल के बागों की सिंचाई के लिए टैंकर से पानी मंगवा रहे हैं, ताकि पेड़ों को सूखे से बचाया जा सके। किसानों को उम्मीद है कि निर्यात बढ़ने से बाजार में फिर से स्थिरता आएगी।