×

भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर में एआई और सतत विकास का योगदान

भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर में एआई और सतत विकास का समागम एक नई दिशा में ले जा सकता है। उद्योग के नेताओं ने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं के माध्यम से भारत में बड़े बदलाव संभव हैं। जानें कैसे ये तकनीकें शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने में मदद कर रही हैं और भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उत्पादों के उत्पादन में योगदान दे सकती हैं।
 

भारत में एआई और सतत विकास का समागम

डालियान (चीन) : एआई आधारित तकनीक और सतत विकास का संगम भारत के महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर में व्यापक परिवर्तन ला सकता है। यह जानकारी उद्योग के नेताओं ने बुधवार को साझा की।


वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की 'एनुअल मीटिंग्स ऑफ द न्यू चैंपियंस' के दौरान, 'ट्रांसफॉर्मिंग इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम प्रोग्राम' के प्रमुख जोर्गेन सैंडस्ट्रॉम ने बताया कि भारत में नवीकरणीय ऊर्जा और स्थायी औद्योगिक विकास के लिए कई अवसर मौजूद हैं।


सैंडस्ट्रॉम ने गुजरात के मुंद्रा और हैदराबाद में ऊर्जा परियोजनाओं का दौरा करते हुए देखा कि भारत में कई हरित ऊर्जा पहलों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ऐसे पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं को विभिन्न क्षेत्रों में लागू किया जाना चाहिए।


उन्होंने कहा, "मुंद्रा और कच्छ रेगिस्तान के आस-पास के परियोजनाएं वर्टिकल इंटीग्रेशन पर आधारित हैं, जहां एक ओर साफ-सुथरी बिजली मिलती है और दूसरी ओर ग्रीन अमोनिया, ग्रीन स्टील जैसे अन्य साफ उत्पाद प्राप्त होते हैं।"


सैंडस्ट्रॉम ने आगे कहा, "इससे शिपिंग और परिवहन को अधिक स्वच्छ बनाया जा सकता है और उद्योग का इलेक्ट्रिफिकेशन किया जा सकता है।"


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और औद्योगिक परिवर्तन में इसकी भूमिका पर चर्चा करते हुए, उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के लिए केवल उद्योग पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि कई नीतिगत क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम सामूहिक कार्रवाई पर जोर दे रहा है और कंपनियों को एक साथ काम करने के लिए प्रेरित कर रहा है।


सैंडस्ट्रॉम ने बताया कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा, विशेषकर सौर ऊर्जा और अन्य स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में काफी प्रगति की है। गुजरात के खावड़ा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर स्थापित सिस्टम और हैदराबाद में पंप स्टोरेज परियोजनाएं देश की ऊर्जा संक्रमण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।


उनके अनुसार, इन परिवर्तनों से भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया के उत्पादन में सहायता मिल सकती है, जिनका उपयोग परिवहन, कृषि और अन्य क्षेत्रों में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पारंपरिक प्रणालियों से स्थायी मॉडल की ओर बढ़ने के लिए व्यापक योजना, समन्वय और एक व्यवस्थित दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।


वहीं, सोलिनास इंटीग्रिटी के संस्थापक और सीईओ दिव्यांशु कुमार ने शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई-संचालित रोबोटिक समाधान पूरे भारत में सीवर और पाइपलाइन के रखरखाव के तरीके को बदल रहे हैं।


कुमार ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भूमिगत सीवर और जल नेटवर्क में रुकावट, लीक और संरचना से जुड़ी कमियों का पता लगाने में मदद करता है। रोबोटिक निरीक्षण से नगरपालिका निगमों को इन्फ्रास्ट्रक्चर का बेहतर रखरखाव करने और संचालन लागत को कम करने में सहायता मिलती है।