भारत में एथेनॉल ईंधन का नया युग: फ्लेक्स फ्यूल कारों की तैयारी
नई ईंधन नीति का आगाज़
नई दिल्ली: देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच, कार चलाने के तरीके में बदलाव की तैयारी हो रही है। केंद्र सरकार ने 100% शुद्ध एथेनॉल, जिसे E100 कहा जाता है, को वाहनों में ईंधन के रूप में उपयोग करने के लिए नए नियमों को मंजूरी दी है। इस निर्णय के बाद फ्लेक्स फ्यूल तकनीक वाली कारों का विकास संभव हो गया है। उम्मीद की जा रही है कि अगले वर्ष ऑटो कंपनियां ऐसे मॉडल पेश करेंगी जो एथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग करेंगे।
अब तक, देश में पेट्रोल के साथ एथेनॉल के मिश्रण पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा था। E20 में पेट्रोल के साथ 20% एथेनॉल का मिश्रण होता है। नए नियमों के तहत E100, यानी 100% शुद्ध एथेनॉल का उपयोग भी वाहनों में किया जा सकेगा। फ्लेक्स फ्यूल इंजन की विशेषता यह होगी कि यह केवल एथेनॉल पर ही नहीं, बल्कि पेट्रोल और एथेनॉल के विभिन्न मिश्रणों पर भी चल सकेगा। सरकार इस ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए भी प्रयास कर रही है।
कंपनियों की तैयारी
मारुति सुजुकी ने पहले ही WagonR का फ्लेक्स फ्यूल प्रोटोटाइप पेश किया है, जो 20% से लेकर 85% एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चल सकता है। अब कंपनी इसे 100% एथेनॉल के अनुकूल बनाने और अगले वर्ष लॉन्च करने की योजना बना रही है। इससे ग्राहकों के लिए पेट्रोल के अलावा एक नया ईंधन विकल्प उपलब्ध हो सकता है।
टोयोटा ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया है। कंपनी ने भारत में Innova Hycross का पहला 100% एथेनॉल से चलने वाला प्रोटोटाइप मॉडल पेश किया है, जिसमें एथेनॉल इंजन के साथ हाइब्रिड इलेक्ट्रिक तकनीक भी शामिल है। इसी तरह, हुंडई भी अपने इंजनों को इस प्रकार अपडेट करने की योजना बना रही है कि वे 100% एथेनॉल वाले ईंधन का उपयोग कर सकें।
आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव
एथेनॉल की कीमत पेट्रोल की तुलना में कम होने के कारण इसे ईंधन खर्च को कम करने वाले विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। यदि देश में E100 की उपलब्धता बढ़ती है, तो वाहन मालिकों को पेट्रोल के साथ एक नया विकल्प मिल सकता है। इसके अलावा, एथेनॉल को एक अपेक्षाकृत साफ ईंधन माना जाता है, जो वाहनों से होने वाले हानिकारक उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकता है।
भारत अपनी आवश्यकताओं का 80% से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से आयातित तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। सरकार का लक्ष्य देश के विभिन्न हिस्सों में एथेनॉल ईंधन की उपलब्धता बढ़ाना है। यदि यह व्यवस्था बड़े पैमाने पर विकसित होती है, तो भविष्य में भारतीय वाहन बाजार में E100 और फ्लेक्स फ्यूल कारों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।