भारत में कौशल विकास की आवश्यकता और एआई का भविष्य
भारत में कौशल विकास की चुनौती
मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन ने सही कहा है कि यदि पश्चिमी सभ्यता और चीन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं, तो भारत की युवा आबादी को क्या करना चाहिए? क्या वे केवल एआई डेटा सेंटरों में काम करेंगे या फिर ठेके पर सफाई का काम करेंगे? निश्चित रूप से, एआई के विकास से कई नौकरियां खत्म होंगी, विशेषकर व्हाइट कॉलर नौकरियां। ऐसे में भारत की बढ़ती जनसंख्या के लिए क्या विकल्प बचेगा?
नागेश्वरन का यह भी कहना है कि लोगों को बढ़ई, प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन जैसे व्यावहारिक कौशल सीखने की आवश्यकता है। लेकिन क्या भारत में केवल कहने से कुछ होता है? प्रधानमंत्री मोदी का स्किल इंडिया अभियान क्या सफल रहा? क्या किसी हिंदू परिवार में आपने सुना है कि उनका बच्चा बढ़ई या प्लंबर बना है? जबकि मुस्लिम परिवारों में ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ युवा कुशल कारीगर बनकर काम कर रहे हैं।
इसलिए, बढ़ई बनने की सलाह हिंदू समुदाय के लिए है, न कि मुस्लिम समुदाय के लिए।
मुस्लिम समुदाय को कोई संकट नहीं है। मोदी सरकार की उपलब्धियों में से एक है मुस्लिम आबादी का आर्थिक सशक्तीकरण। वे न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, बल्कि मेहनत करके भी कमाई कर रहे हैं। यह समुदाय परजीवी नहीं है, बल्कि मेहनती है।
भारत में 35 वर्ष से कम उम्र की 65 प्रतिशत युवा आबादी है, जिनमें से अधिकांश बिना परीक्षा के डिग्रियां प्राप्त कर रहे हैं। कंपनियों की शिकायत है कि इंजीनियरिंग और एमबीए के छात्रों में कुशलता की कमी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले बारह वर्षों में कई योजनाओं की घोषणा की है, जैसे स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, और मेक इन इंडिया। लेकिन क्या हिंदू युवा इन कौशलों को अपनाएंगे? मोदी सरकार का आदर्श व्यापार है, जिसमें मुनाफे की भूख है।
इसलिए, 21वीं सदी का हिंदू काल न तो कौशल प्राप्ति का है और न ही एआई में प्रतिस्पर्धा करने का। भारत को यह समझने की आवश्यकता है कि अगले बीस वर्षों में वैश्विक बुद्धि का विकास किस दिशा में जाएगा।