×

विश्व योग दिवस: अवसाद से मुक्ति के लिए योगासन

विश्व योग दिवस के नजदीक, भारत सरकार का आयुष मंत्रालय योगासन के माध्यम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने पर जोर दे रहा है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नहीं, बल्कि मानसिक शांति और तनाव में कमी के लिए भी अत्यंत प्रभावी है। मंत्रालय ने अवसाद से मुक्ति के लिए विभिन्न योगासनों और प्राणायामों की जानकारी साझा की है। नियमित योगाभ्यास से न केवल अवसाद से लड़ने में मदद मिलती है, बल्कि यह समग्र स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है।
 

विश्व योग दिवस की तैयारी

विश्व योग दिवस नजदीक है, और इस अवसर पर भारत सरकार का आयुष मंत्रालय योग के माध्यम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने पर जोर दे रहा है। मंत्रालय नए योगासनों के लाभों के बारे में जानकारी साझा कर रहा है, विशेष रूप से अवसाद से राहत पाने के लिए।


योग का महत्व

योग विशेषज्ञों का मानना है कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नहीं, बल्कि मानसिक शांति, तनाव में कमी और भावनात्मक संतुलन के लिए भी अत्यंत प्रभावी है। आजकल की तेज़-तर्रार जिंदगी में अवसाद एक सामान्य समस्या बन गई है, जिससे निपटने के लिए नियमित योगाभ्यास आवश्यक हो गया है।


आयुष मंत्रालय का संदेश

आयुष मंत्रालय का नारा है “योग युक्त, रोग मुक्त”। मंत्रालय नागरिकों से आग्रह करता है कि वे प्रतिदिन सुबह इन आसनों का अभ्यास करें। शुरुआत में 15-20 मिनट का समय देकर धीरे-धीरे इसे बढ़ाया जा सकता है। योग न केवल अवसाद से लड़ने में मदद करता है, बल्कि समग्र स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है।


योगासन और प्राणायाम

आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित योगाभ्यास तनाव को बढ़ाने वाले हार्मोन को कम करता है और मानसिक समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक होता है। अवसाद से लड़ने वाले योगासन और प्राणायाम में ध्यान, भ्रामरी प्राणायाम, ताड़ासन, भुजंगासन और अनुलोम-विलोम शामिल हैं।


ध्यान और आसनों के लाभ

ध्यान: रोजाना 10-15 मिनट ध्यान करने से मानसिक उलझनें कम होती हैं और आंतरिक शांति मिलती है।


पवनमुक्तासन: यह आसन पेट की समस्याओं और मानसिक अशांति को दूर करता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा निकलती है।


भ्रामरी प्राणायाम: इस प्राणायाम से मस्तिष्क शांत होता है और तनाव कम होता है।


ताड़ासन: यह आसन शरीर और मन को ऊर्जावान बनाता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है।


भुजंगासन: यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है और डिप्रेशन से जुड़ी नकारात्मक भावनाओं को कम करता है।


अनुलोम-विलोम प्राणायाम: यह प्राणायाम मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को संतुलित करता है और मन को शांत रखता है।