हिमाचल प्रदेश में पर्यटन ढांचे के विकास के लिए 84 करोड़ की मंजूरी
केंद्र सरकार का बड़ा कदम
केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश में पर्यटन के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए 84 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। यह धनराशि धार्मिक, सीमावर्ती और दूरदराज के पर्यटन स्थलों के विकास पर खर्च की जाएगी। इसमें ऊना के मां चिंतपूर्णी मंदिर के लिए 56.26 करोड़ रुपये और किन्नौर के रकछम तथा स्पीति के काजा में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के लिए 24.82 करोड़ रुपये शामिल हैं।
चिंतपूर्णी क्षेत्र में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
ऊना में स्थित मां चिंतपूर्णी देवी मंदिर के विकास के लिए सबसे अधिक राशि निर्धारित की गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए यहां पर्यटन और धार्मिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।
चीन सीमा के निकट पर्यटन क्षेत्रों पर ध्यान
किन्नौर के सांगला घाटी में रकछम और लाहौल-स्पीति का काजा क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। रकछम भारत-तिब्बत वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट है, जबकि काजा स्पीति घाटी का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र है। इन क्षेत्रों में पर्यटन ढांचे के विकास से दूरदराज के इलाकों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार की जिम्मेदारी
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पर्यटन स्थलों और उत्पादों का विकास मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। हालांकि, पर्यटन मंत्रालय विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जिससे वे पर्यटन अधोसंरचना विकसित कर सकें। यह सहायता बजट, योजना के दिशा-निर्देशों और राज्य सरकारों द्वारा प्रस्तुत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के आधार पर दी जाती है।
हिमालयन सर्किट के विकास के लिए अतिरिक्त राशि
केंद्र सरकार ने हिमालयन सर्किट के विकास के लिए 68.34 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी स्वीकृत की है। इस राशि का उपयोग शिमला, क्यारीघाट, हाटकोटी, मनाली, कांगड़ा, धर्मशाला, बीड़, पालमपुर और चंबा जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के बुनियादी ढांचे के विकास में किया जाएगा।