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2026 से लागू होंगे नए श्रम कानून: जानें क्या बदलने वाला है?

भारत में 1 अप्रैल 2026 से नए श्रम कानून लागू होने जा रहे हैं, जो कर्मचारियों की सैलरी, ओवरटाइम, काम के घंटे और सामाजिक सुरक्षा को प्रभावित करेंगे। ये चार नए श्रम कोड 44 पुराने कानूनों को सरल और पारदर्शी ढांचे में समेटेंगे। इस बदलाव से 100 करोड़ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलने की उम्मीद है। जानें इन नए कानूनों के तहत क्या अधिकार मिलेंगे महिलाओं और वरिष्ठ कर्मचारियों को, और कैसे ओवरटाइम की नई व्यवस्था कामकाजी संस्कृति को प्रभावित करेगी।
 

नए श्रम कानूनों का आगाज़


1 अप्रैल 2026 से भारत में नए श्रम कानून लागू होने जा रहे हैं। ये परिवर्तन कर्मचारियों की वेतन संरचना, ओवरटाइम नियम, कार्य घंटे और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित प्रावधानों को पूरी तरह से नया रूप देंगे। केंद्र सरकार ने चारों श्रम कोड के नियमों को लगभग अंतिम रूप दे दिया है, जिसका प्रभाव करोड़ों कर्मचारियों और कंपनियों पर पड़ेगा। ये ऐतिहासिक सुधार 44 पुराने श्रम कानूनों को एक सरल और पारदर्शी ढांचे में समेटने का कार्य करेंगे, जिससे श्रमिकों के अधिकार मजबूत होंगे और नियोक्ताओं को भी अधिक लचीलापन प्राप्त होगा।


चार नए श्रम कोड और उनका उद्देश्य

चार नए श्रम कोडों में वेतन संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता शामिल हैं। इनका मुख्य उद्देश्य 44 पुराने श्रम कानूनों को एक सरल ढांचे में समेटना है। इन कोडों में कुल 29 प्रावधान होंगे, जिससे पहले की जटिल कानूनी व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाया जाएगा। सरकार ने इन कोडों को 21 नवंबर 2025 से अधिसूचित किया था, और ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक सलाह के लिए रखा गया था। जनवरी तक प्राप्त सुझावों के बाद मंत्रालय ने केंद्रीय स्तर पर इनके क्रियान्वयन के नियमों को अंतिम रूप दे दिया है।


काम के घंटों में बदलाव

नए श्रम कोडों के अंतर्गत, काम के मानक घंटे पहले की तरह 8 घंटे प्रतिदिन और 48 घंटे साप्ताहिक रहेंगे। हालांकि, काम करने के तरीकों में अधिक लचीलापन प्रदान किया गया है। नियोक्ता अब कर्मचारियों को फ्लेक्सिबल वर्किंग कल्चर प्रदान कर सकेंगे। साप्ताहिक काम के घंटों के प्रबंधन के आधार पर अतिरिक्त ओवरटाइम विकल्प भी उपलब्ध होंगे। ओवरटाइम की यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय श्रम प्रथाओं के अनुरूप रखी गई है, जिससे कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को लचीलापन मिलेगा, जबकि श्रमिकों के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी।


सामाजिक सुरक्षा का विस्तार

नए श्रम कोड का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाना है। सरकार मार्च 2026 तक सामाजिक सुरक्षा लाभों को 100 करोड़ श्रमिकों तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है, जबकि वर्तमान में यह आंकड़ा लगभग 94 करोड़ है। यह एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि 2015 में सामाजिक सुरक्षा कवरेज मात्र 19 प्रतिशत थी, जो 2025 तक बढ़कर 64 प्रतिशत से अधिक हो गई है। अब असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर, साथ ही स्वरोजगार करने वाले लोग भी शामिल होंगे।


महिलाओं और वरिष्ठ कर्मचारियों के अधिकार

नए श्रम कोडों में पारदर्शिता और श्रमिक संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। अब सभी कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य होगा, जिससे रोजगार की औपचारिक मान्यता सुनिश्चित होगी। नए लेबर कोड में समान काम के लिए समान वेतन और महिलाओं के लिए समान अवसरों की व्यवस्था की गई है। महिलाएं अब उचित सुरक्षा प्रबंधों के साथ अलग-अलग शिफ्टों में भी काम कर सकेंगी। इसके अलावा, 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के श्रमिकों को मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच का अधिकार दिया गया है।


अतिरिक्त काम की व्यवस्था

नई व्यवस्था में ओवरटाइम को नियमित किया गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुरूप श्रमिकों के लिए एक विकल्प के रूप में पेश किया जाएगा। इससे उद्योगों को काम के उतार-चढ़ाव को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी, साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि अतिरिक्त घंटों के काम के लिए श्रमिकों को उचित मुआवजा मिले। यह कदम नौकरी देने वालों और लेने वालों दोनों के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण पेश करता है।