BRICS Summit 2026: व्यापारिक प्रतिबंधों पर चिंता व्यक्त
BRICS Summit 2026 की तैयारी में व्यापारिक रुख
नई दिल्ली: BRICS Summit 2026 की मेज़बानी के लिए भारत की तैयारी के बीच, सदस्य देशों ने व्यापार के मुद्दे पर अपने विचार स्पष्ट कर दिए हैं। BRICS के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों ने एकतरफा तरीके से लागू किए जाने वाले ऊंचे टैरिफ और अन्य व्यापारिक प्रतिबंधों के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि ऐसे निर्णय वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं और पहले से ही दबाव में चल रही वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नए खतरे उत्पन्न कर सकते हैं।
टैरिफ के खिलाफ BRICS का स्पष्ट संदेश
BRICS के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के प्रमुखों ने कहा कि उच्च टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं अंतरराष्ट्रीय व्यापार में असंतुलन पैदा कर सकती हैं। समूह का मानना है कि ऐसे कदम WTO के निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं होने चाहिए। BRICS ने बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि देशों के बीच व्यापार किसी एकतरफा निर्णय से अचानक प्रभावित न हो और वैश्विक व्यापार में विश्वास बना रहे।
अमेरिका की नीति पर बिना नाम लिए निशाना
हालांकि संयुक्त बयान में ट्रंप या अमेरिका का नाम नहीं लिया गया, लेकिन संकेत स्पष्ट हैं। अमेरिकी व्यापार नीति में कई देशों के साथ टैरिफ को लेकर सख्त रुख देखने को मिला है। इसके साथ ही BRICS से जुड़ने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ की धमकियों ने भी चिंता बढ़ाई है। इस प्रकार, BRICS का ताजा रुख व्यापारिक दबाव के खिलाफ एक सामूहिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता
BRICS देशों ने वर्तमान वैश्विक आर्थिक स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की है। भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार का विभाजन, नीतियों में अनिश्चितता, महंगाई और बढ़ते कर्ज जैसी चुनौतियां अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं। समूह के अनुसार, इन परिस्थितियों का दबाव विशेष रूप से उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। ऐसे समय में व्यापार को और कठिन बनाने वाले कदम वैश्विक आर्थिक स्थिति के लिए समस्याएं बढ़ा सकते हैं।
WTO के नियमों वाली व्यवस्था की आवश्यकता
BRICS चाहता है कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में WTO की केंद्रीय भूमिका बनी रहे। समूह की मांग है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नियम सभी देशों के लिए समान और स्पष्ट हों। किसी एक देश के अचानक लिए गए निर्णय से अन्य देशों के व्यापार और अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। BRICS का यह रुख ऐसे समय में आया है, जब टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों को लेकर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव लगातार चर्चा में है।