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सिक्किम की टैक्स व्यवस्था: मूल निवासियों को छूट और केंद्र सरकार की आय

सिक्किम के मूल निवासियों को 1975 से इनकम टैक्स में छूट मिली हुई है, जिससे राज्य का टैक्स संग्रहण अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। हालांकि, राज्य सरकार जीएसटी, बिजली परियोजनाओं की रॉयल्टी और अन्य स्रोतों से आय प्राप्त करती है। जानें कैसे पर्यटन और कृषि जैसे क्षेत्रों से सिक्किम की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और केंद्र सरकार को भी आय होती है।
 

सिक्किम के निवासियों को टैक्स छूट

सिक्किम के स्थानीय निवासी करोड़ों रुपये कमाने के बावजूद उन्हें सरकार को एक भी रुपया इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता। यह विशेष अधिकार उन्हें 1975 में भारत में शामिल होने के समय संविधान के सेक्शन 371F के तहत मिला था। राज्य सरकार अपने खर्चों को पूरा करने के लिए जीएसटी, बिजली परियोजनाओं की रॉयल्टी, शराब और गाड़ियों पर टैक्स, और केंद्र सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता पर निर्भर करती है।


सिक्किम की टैक्स व्यवस्था का इतिहास

सिक्किम लगभग 330 वर्षों तक एक स्वतंत्र रियासत रहा और 1975 में भारत का हिस्सा बनने के बाद यह तय किया गया कि यहां की पुरानी टैक्स व्यवस्था को नहीं बदला जाएगा। यह छूट केवल उन लोगों के लिए है जो 1975 से पहले से यहां निवास कर रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति दिल्ली या मुंबई जैसे अन्य राज्यों से सिक्किम में बसता है, तो उसे पूरे देश की तरह इनकम टैक्स देना पड़ता है।


इनकम टैक्स संग्रहण की स्थिति

2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, सिक्किम में टैक्स संग्रहण अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। उत्तर प्रदेश में 81,868.25 करोड़, मध्य प्रदेश में 35,825.07 करोड़, महाराष्ट्र में 28,828.91 करोड़, तमिलनाडु में 18,615.35 करोड़ और गुजरात में 15,872.56 करोड़ रुपये का टैक्स जमा होता है, जबकि सिक्किम में यह आंकड़ा केवल 1,770.72 करोड़ रुपये है। यह अंतर इसलिए है क्योंकि सिक्किम के मूल निवासियों को टैक्स नहीं देना पड़ता।


केंद्र सरकार की आय के स्रोत

हालांकि सिक्किम से इनकम टैक्स नहीं मिलता, लेकिन केंद्र सरकार के पास अन्य आय के स्रोत हैं। जीएसटी यहां का सबसे बड़ा स्रोत है। जब सिक्किम में कोई सामान बेचा जाता है, होटल में कमरा बुक होता है या कोई सेवा ली जाती है, तो उस पर जीएसटी लगता है, जिसका एक हिस्सा केंद्र सरकार को जाता है। इसके अलावा, बिजली परियोजनाओं पर रॉयल्टी, शराब और गाड़ियों पर टैक्स भी राज्य सरकार की आय का हिस्सा हैं।


राज्य की आर्थिक स्थिति

राज्य के बजट में हर 100 रुपये में से 48 रुपये केंद्र के टैक्स हिस्से से आते हैं और 22 रुपये केंद्र से मिले कर्ज से। 2025-26 के बजट में केंद्र से 5,519 करोड़ रुपये टैक्स हिस्सेदारी के रूप में और 2,600 करोड़ रुपये अलग से सहायता के रूप में मिलने का अनुमान है। सीधे शब्दों में कहें तो सिक्किम के लोग भले ही टैक्स न दें, लेकिन देश के अन्य राज्यों के टैक्सपेयर्स का पैसा वहां पहुंचता है।


सिक्किम की आय के प्रमुख स्रोत

पर्यटन सिक्किम की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2022-23 में लगभग 20 लाख पर्यटक सिक्किम आए, जो राज्य की कुल जनसंख्या से तीन गुना अधिक है। इन पर्यटकों के कारण होटल, खाने-पीने की जगहों और पर्यटन पर जीएसटी जमा होता है, जो सरकार की आय में योगदान करता है। सिक्किम में अधिकांश बिजली पहाड़ी नदियों से उत्पन्न होती है।


बिजली परियोजनाओं का महत्व

तीस्ता नदी पर स्थित पावर प्रोजेक्ट में सिक्किम सरकार की 60% हिस्सेदारी थी, जो आय का एक बड़ा स्रोत था। 2023 में आई बाढ़ में यह प्रोजेक्ट नष्ट हो गया, जिससे राज्य को लगभग 25,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सिक्किम देश में सबसे अधिक इलायची उत्पादन करने वाला राज्य है और यहां से दवाइयां और ऑर्गेनिक सामान भी बाहर भेजा जाता है, जिससे राज्य को आय होती है और जीएसटी के माध्यम से केंद्र को भी लाभ मिलता है।