भारत के शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की भारी निकासी का कारण
वैश्विक घटनाओं का असर भारतीय शेयर बाजार पर
दुनिया भर में चल रहे संघर्ष, युद्ध जैसी स्थितियों और बदलते वैश्विक परिदृश्य का प्रभाव अब भारत के शेयर बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। रूस-यूक्रेन युद्ध की निरंतरता और ईरान-अमेरिका के बीच तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में गतिविधियों पर असर पड़ा है, जिससे भारतीय बाजार में भी हलचल मची है। इस माह के दौरान, विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 60,847 करोड़ रुपये की निकासी की है.
निकासी का आंकड़ा
यह स्थिति दर्शाती है कि वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनजर निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं और अपने धन को बाजार में नहीं रखना चाह रहे हैं। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में हुई इस निकासी के साथ, 2026 के पहले चार महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा कुल निकासी 1.92 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। पिछले वर्ष, यानी 2025 में, कुल निकासी केवल 1.66 लाख करोड़ रुपये थी.
मार्च और अप्रैल में निकासी की बाढ़
साल 2026 में फरवरी को छोड़कर, सभी महीनों में FPI शुद्ध विक्रेता बने रहे। जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये की निकासी हुई, जबकि फरवरी में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो पिछले 17 महीनों में सबसे अधिक था। हालांकि, मार्च में अचानक स्थिति बदल गई और रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई, जो अप्रैल में भी जारी रही.
बिकवाली के कारण
बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि निरंतर बिकवाली वैश्विक आर्थिक दबावों और बढ़ते जोखिमों का परिणाम है। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के रिसर्च प्रिंसिपल मैनेजर हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंताएं फिर से बढ़ गईं.
निवेशकों की चिंताएं
एंजेल वन के वरिष्ठ विश्लेषक वाकर जावेद खान ने अप्रैल की निकासी को अमेरिका-ईरान तनाव के कारण जोखिम से बचने की सामान्य प्रतिक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने, रुपये की कमजोरी और महंगाई की चिंताओं ने निवेशकों के विश्वास को प्रभावित किया है.
भविष्य की संभावनाएं
वाकर जावेद खान ने कहा कि यदि ईरान में सीजफायर बना रहता है और WTI क्रूड ऑयल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आती हैं, तो विदेशी निवेश फिर से स्थिर हो सकता है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव या अमेरिकी 10-वर्षीय बॉंड रिटर्न 4.5 प्रतिशत से ऊपर जाने जैसी स्थितियों से फिर से बिकवाली बढ़ सकती है.