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MSMEs: भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ और उनकी चुनौतियाँ

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, MSMEs का मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात में बड़ा योगदान है। हालांकि, कर्ज की कमी और देरी से भुगतान जैसी समस्याएँ इनकी वृद्धि में बाधा डाल रही हैं। सरकार ने महिलाओं को उद्यमिता में बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएँ शुरू की हैं और ODR पोर्टल के माध्यम से विवादों का समाधान करने का प्रयास कर रही है। जानें MSMEs का भविष्य क्या है और वे कैसे आगे बढ़ सकते हैं।
 

MSMEs का महत्व

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) अब भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बन चुके हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, ये उद्यम देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 35.4 प्रतिशत, निर्यात में लगभग 48.58 प्रतिशत और कुल जीडीपी में 31.1 प्रतिशत योगदान देते हैं। भारत में 7.47 करोड़ से अधिक MSMEs हैं, जो 32.82 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।


चुनौतियाँ और समस्याएँ

आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि MSMEs को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें सबसे बड़ी समस्या कर्ज की अनुपलब्धता है। कई छोटे उद्यमों के पास संपत्ति गिरवी रखने के लिए आवश्यक दस्तावेज नहीं होते। विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 27 प्रतिशत MSMEs वित्तीय सहायता को अपनी सबसे बड़ी समस्या मानते हैं।


सरकार के प्रयास

महिलाओं को उद्यमिता में बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नई क्रेडिट सुविधाएँ शुरू की हैं। उद्यम रजिस्ट्रेशन से महिलाओं को सहायता मिल रही है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में MSME क्रेडिट की वृद्धि बड़ी कंपनियों की तुलना में अधिक रही। सूक्ष्म और लघु उद्यमों को दिए गए ऋण में अगस्त 2025 तक 20.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि बड़ी कंपनियों में यह केवल 1.8 प्रतिशत थी।


सरकार ने अप्रैल 2023 से क्रेडिट गारंटी स्कीम को अपडेट किया है, जिसमें गारंटी कवर ₹10 करोड़ तक बढ़ा दिया गया है। महिलाओं के उद्यमों के लिए गारंटी कवर 90 प्रतिशत कर दिया गया है। SRI फंड के माध्यम से 15,442 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता 682 MSMEs को प्रदान की जा चुकी है।


MSME की सबसे बड़ी समस्या

कॉर्पोरेट एडवोकेट सौरभ शर्मा के अनुसार, MSMEs की सबसे बड़ी समस्या देरी से भुगतान है। MSMEs का 8.1 लाख करोड़ रुपये का पैसा इस कारण से अटका हुआ है। इसे हल करने के लिए ऑनलाइन डिस्प्यूट रिजोल्यूशन (ODR) पोर्टल की शुरुआत की गई है, जो एक सरल, सस्ता और डिजिटल समाधान है।


क्या ODR MSMEs की मदद करेगा?

MSMEs देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और लाखों लोगों को रोजगार देते हैं। लेकिन उनकी सबसे बड़ी समस्या देरी से भुगतान है। वर्तमान में MSME क्षेत्र में लगभग 8.1 लाख करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है, जिससे उनकी नकदी प्रवाह प्रभावित हो रहा है।


आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि जब MSME अपने बकाया वसूलने के लिए कानूनी कार्रवाई करते हैं, तो अक्सर खरीदार नाराज हो जाते हैं, जिससे आगे के ऑर्डर रुक जाते हैं। अब सरकार ODR के माध्यम से इन समस्याओं का समाधान करने का प्रयास कर रही है।


विवादों का समाधान कैसे होता है?

एडवोकेट सौरभ शर्मा ने बताया कि MSME ODR पोर्टल के माध्यम से विवादों का समाधान अब सरल और कम खर्चीला हो गया है। शिकायत के बाद दोनों पक्षों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया जाता है। यदि बातचीत सफल नहीं होती, तो सुलह और मध्यस्थता की प्रक्रिया अपनाई जाती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन है और 24 घंटे उपलब्ध है।


इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि MSMEs बिना खरीदार के साथ संबंध खराब किए अपना पैसा वसूल कर सकते हैं। पारंपरिक अदालतों की तुलना में यह प्रक्रिया सस्ती और तेज है।


MSME का भविष्य

पिछले दो वर्षों में स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज (SME) IPO में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2024-25 में SME IPO की संख्या में 87 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। UPI के माध्यम से आवेदन करने की सुविधा और अच्छे लिस्टिंग लाभ ने रिटेल निवेशकों को आकर्षित किया है। सरकार अब इसके दायरे को बढ़ाने की योजना बना रही है, जिसमें रक्षा क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने की योजना शामिल है।