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Phool.co: पर्यावरण के प्रति जागरूकता से बना 200 करोड़ का साम्राज्य

Phool.co की यात्रा एक अनोखी कहानी है, जो पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सफलता को जोड़ती है। 2015 में शुरू हुई यह पहल, अब 200 करोड़ रुपये के मूल्यांकन तक पहुंच चुकी है। जानें कैसे अंकित अग्रवाल और उनके साथी ने फूलों के कचरे को एक लाभदायक व्यवसाय में बदल दिया। इस स्टार्टअप ने न केवल पर्यावरण को बचाने का काम किया है, बल्कि कई महिलाओं को रोजगार भी प्रदान किया है।
 

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनोखी पहल

2015 में मकर संक्रांति के अवसर पर कानपुर के गंगा घाट पर अंकित अग्रवाल ने देखा कि श्रद्धालु पूजा के फूलों को नदियों में बहा रहे हैं। ये फूल, जो पेस्टिसाइड और रंगों से भरे थे, नदियों को प्रदूषित कर रहे थे। ऑटोमेशन साइंस में विशेषज्ञता रखने वाले अंकित ने अपने पर्यावरण इंजीनियर मित्र प्रतीक कुमार के साथ मिलकर इस समस्या का समाधान खोजने का निर्णय लिया। प्रारंभिक असफलताओं के बाद, 2017 में उन्होंने 'कानपुर फ्लावरसाइक्लिंग प्राइवेट लिमिटेड' की स्थापना की, जिसे आज 'Phool.co' के नाम से जाना जाता है.


धूपबत्ती से 'फ्लेदर' तक का सफर

धूपबत्ती से लेकर 'फ्लेदर' तक का सफर

संस्थापकों ने शुरुआत में मंदिरों से फेंके गए फूलों को इकट्ठा कर अगरबत्ती और धूपबत्ती बनाना शुरू किया। इस प्रक्रिया में उन्होंने हाशिए पर मौजूद महिलाओं को रोजगार देने का प्रयास किया। इसके बाद, कंपनी ने फूलों के कचरे से 'फ्लेदर' नामक बायो-मटेरियल विकसित किया, जो चमड़े का एक विकल्प है। इस नवाचार ने फैशन उद्योग का ध्यान आकर्षित किया। जून 2026 में, एनसीएलटी (NCLT) इलाहाबाद पीठ ने 'फ्लेदर' व्यवसाय को मूल कंपनी से अलग कर 'फ्लेदर प्राइवेट लिमिटेड' में डिमर्ज (demerger) करने की अनुमति दी.


निवेशकों का विश्वास और 200 करोड़ का साम्राज्य

निवेशकों का भरोसा और 200 करोड़ का साम्राज्य

'फूल' को शुरुआत में आईआईटी कानपुर और सोशल अल्फा का समर्थन प्राप्त हुआ। इसके बाद, अप्रैल 2022 में सिक्स्थ सेंस वेंचर्स के नेतृत्व में सीरीज-ए फंडिंग में कंपनी ने लगभग 8 मिलियन डॉलर (95 करोड़ रुपये) जुटाए, जिसमें अभिनेत्री आलिया भट्ट ने भी निवेश किया। वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का परिचालन राजस्व लगभग 77 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और Tracxn के आंकड़ों के अनुसार, आज इस स्टार्टअप का मूल्यांकन करीब 200 करोड़ रुपये है.