RBI ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, अर्थव्यवस्था की स्थिति पर नजर
नई दिल्ली में RBI की बैठक
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ब्याज दरों में कोई परिवर्तन नहीं करने का निर्णय लिया है। 5 अगस्त, 2026 को आयोजित मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में सभी 6 सदस्यों ने सहमति से रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने का फैसला किया है।
ब्याज दरों में स्थिरता के कारण स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर 5% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) तथा बैंक रेट 5.50% पर बने रहेंगे। बैंक का रुख 'न्यूट्रल' है, जिसका अर्थ है कि भविष्य में ब्याज दरों में कमी या वृद्धि महंगाई और विकास के आंकड़ों पर निर्भर करेगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक चुनौतियाँ
देश की अर्थव्यवस्था और ग्लोबल चुनौतियां
RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में घरेलू मांग में वृद्धि देखी गई है। निर्माण कार्य, पूंजी वस्तुओं का उत्पादन और बैंकों से बढ़ते ऋण के कारण निवेश और उपभोक्ता खरीदारी में सुधार हुआ है। इसके साथ ही, सेवाओं और मर्चेंडाइज निर्यात में सुधार ने बाहरी व्यापार को भी सहारा दिया है।
हालांकि, गवर्नर ने चेतावनी दी कि कुछ वैश्विक जोखिम अभी भी मौजूद हैं। उच्च क्रूड ऑयल और ऊर्जा की कीमतें, आपूर्ति श्रृंखला की समस्याएं, अल-नीनो के प्रभाव से होने वाली अनियमित बारिश और भू-राजनीतिक तनाव देश की आर्थिक वृद्धि और कृषि को प्रभावित कर सकते हैं।
GDP ग्रोथ का अनुमान
GDP ग्रोथ का अनुमान
RBI ने 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ रेट के अनुमान को बढ़ाकर 6.7% कर दिया है।
तिमाही अनुमान (2026-27):
- Q1: 7.0%
- Q2: 6.4%
- Q3: 6.5%
- Q4: 6.8%
अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1 2027-28) के लिए 7.3% की वृद्धि का अनुमान है।
महंगाई की स्थिति
महंगाई का हाल और आगे का रास्ता
मई-जून 2026 में खुदरा महंगाई 4.4% तक पहुंच गई, जो पिछले 16 महीनों में तय सीमा से नीचे थी। इसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि और घरेलू स्तर पर खाद्य पदार्थों और ईंधन की महंगाई है।
कोर इन्फ्लेशन राहत की बात: खाद्य और ईंधन को छोड़कर कोर इन्फ्लेशन 3.9% पर स्थिर है। यदि इसमें से कीमती धातुओं को भी हटा दिया जाए, तो यह दर 2.3% से 2.5% के बीच है। यह दर्शाता है कि सामान्य बाजार में मांग के कारण महंगाई का दबाव कम है।
आगे का अनुमान: RBI का मानना है कि खाद्य और ईंधन की महंगाई के कारण 2026-27 की तीसरी तिमाही (Q3) में महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है, जिसके बाद इसमें धीरे-धीरे कमी आएगी।
औसत महंगाई दर: पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत CPI इन्फ्लेशन 5.0% रहने की उम्मीद है (Q2 में 4.7%, Q3 में 5.9% और Q4 में 5.5%)। वहीं, कोर इन्फ्लेशन औसतन 4.3% के आसपास रह सकती है।
आगे की रणनीति
आगे की राह
RBI के गवर्नर ने स्पष्ट किया कि मौसम की अनिश्चितताओं और वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए केंद्रीय बैंक जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेगा। जब तक महंगाई और आर्थिक स्थिति की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक दरों में किसी बड़े बदलाव के लिए इंतजार किया जाएगा।