UPI के नए नियम: छोटे व्यापारियों को मिलेगी राहत, जानें क्या हैं बदलाव
नई दिल्ली में यूपीआई के नए दिशा-निर्देश
नई दिल्ली: यूपीआई अब हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। दूध और सब्जियों की खरीदारी से लेकर बिलों के भुगतान तक, यह प्रणाली हर जगह उपयोग की जा रही है। हाल ही में, सरकार ने यूपीआई के लिए कुछ नए नियम जारी किए हैं। अब यूपीआई ऐप प्रदाताओं को किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चार्ज या छिपे हुए शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि व्यापारी इन शुल्कों को ग्राहकों पर न डालें। व्यक्तिगत लेनदेन के लिए कोई मासिक सीमा या मुफ्त लेनदेन की संख्या निर्धारित नहीं की गई है, जिससे आम उपयोगकर्ता पहले की तरह बिना किसी शुल्क के इसका उपयोग कर सकेंगे।
छोटे व्यापारियों के लिए राहत
क्यूआर कोड के माध्यम से हर महीने एक लाख रुपये तक की लेनदेन करने वाले छोटे व्यापारी शून्य एमडीआर का लाभ उठाते रहेंगे। यदि कोई व्यापारी लगातार तीन महीने तक एक लाख रुपये से अधिक का लेनदेन करता है, तो उसे सामान्य श्रेणी में रखा जाएगा। नई व्यवस्था से केवल लगभग चार प्रतिशत व्यापारी प्रभावित होंगे, क्योंकि अधिकांश लेनदेन दो हजार रुपये से कम होते हैं या छूट में आते हैं। ये नियम केवल सीधे बैंक खाते से व्यापारी खाते में होने वाले यूपीआई भुगतान पर लागू होंगे, जबकि रुपे क्रेडिट कार्ड से होने वाले भुगतान अलग रहेंगे। जनवरी 2020 से शून्य एमडीआर की व्यवस्था लागू की गई थी ताकि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिल सके, लेकिन बैंक और फिनटेक कंपनियों ने इसे स्थायी नहीं माना। अब छोटे व्यापारियों के लिए एक अलग कोष बनाया जाएगा, जिसमें कुल एमडीआर का पांच प्रतिशत जाएगा, जिससे यूपीआई की स्वीकार्यता बढ़ेगी।
सामान्य प्रश्न और प्रभाव
बीमा प्रीमियम जो दो हजार रुपये से अधिक हैं, पर केवल पांच रुपये का फ्लैट एमडीआर लागू होगा। ऑटो-पे वाले बिल, ओटीटी सेवाएं या म्यूचुअल फंड पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा, दो हजार रुपये से अधिक के बिजली, पानी या पेट्रोल भुगतान पर भी पांच रुपये का फ्लैट चार्ज रहेगा। एमडीआर वह शुल्क है जो व्यापारी से लिया जाता है, जो बैंक और सिस्टम की लागत को पूरा करता है। क्रेडिट कार्ड पर डेढ़ से दो प्रतिशत का शुल्क लगता है, जबकि यूपीआई पर दो हजार रुपये से ऊपर केवल शून्य दशमलव चार प्रतिशत और अधिकतम तीन सौ रुपये है। छोटे व्यापारियों को अपने पुराने क्यूआर कोड को बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। यह नई व्यवस्था यूपीआई को स्थायी बनाएगी और छोटे व्यापारियों को राहत प्रदान करेगी।