×

UPI लेन-देन पर शुल्क लगाने की तैयारी, जानें क्या होगा असर

भारत में डिजिटल पेमेंट के लिए UPI प्रणाली पर शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नए नियमों के अनुसार, 2000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर 5 प्रतिशत शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे गए पैसों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इस बदलाव का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, खासकर उन पर जो बड़े लेन-देन करते हैं। जानें इस प्रस्तावित नियम के पीछे की वजह और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

डिजिटल पेमेंट में बदलाव

डिजिटल भुगतान की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता था। हालांकि, कुछ कंपनियों ने अब पैसे लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जबकि यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से लेन-देन अभी भी निःशुल्क है। लेकिन अब ऐसा लगता है कि यह निःशुल्क लेन-देन अधिक समय तक नहीं चलने वाला। केंद्र सरकार, जो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में है, UPI लेन-देन पर 0.25 से 0.4 प्रतिशत का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की अनुमति दे सकती है। इसके अलावा, 2000 रुपये से अधिक की भुगतान पर 5 प्रतिशत शुल्क भी लगाया जा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि यदि आप किसी व्यवसाय को 2000 रुपये भेजते हैं, तो आपको 100 रुपये अतिरिक्त, यानी कुल 2100 रुपये खर्च करने होंगे।


चार्ज का विवरण

वर्तमान में प्रस्तावित नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे गए पैसों पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। इसका अर्थ है कि यदि आप किसी दुकान पर भुगतान करते हैं, तो शुल्क लगेगा, लेकिन यदि आप किसी मित्र या रिश्तेदार को पैसे भेजते हैं, तो आपको कोई शुल्क नहीं देना होगा। इस संबंध में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में द टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल पेश किया। इस संशोधन के माध्यम से पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में बदलाव किया जाएगा। प्रस्तावित संशोधनों के तहत बैंकों और पेमेंट सेवा प्रदाताओं द्वारा शुल्क वसूलने पर लगी रोक को हटाया जाएगा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इसे कब लागू किया जाएगा।


शुल्क का प्रभाव

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 5 प्रतिशत शुल्क लगाया जा सकता है। पिछले जुलाई में भारत में कुल 2366 करोड़ UPI लेन-देन हुए, जिनमें से 65 प्रतिशत ऐसे लेन-देन थे जो 2000 रुपये से अधिक के थे। यदि यह शुल्क लागू होता है, तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। एक अधिकारी ने कहा, 'यदि इसे लागू किया गया, तो 95 प्रतिशत लेन-देन पर MDR लागू नहीं होगा।' चर्चा है कि यह शुल्क केवल उन दुकानदारों पर लागू किया जा सकता है जिनका वार्षिक कारोबार 1.5 करोड़ रुपये या उससे अधिक है।


छोटे व्यवसायों को राहत

यदि यह नियम लागू होता है, तो छोटे दुकानदारों, ठेलेवालों और अन्य छोटे व्यवसायों को राहत मिल सकती है। वर्तमान में, MDR क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर लागू होता है, लेकिन अधिकांश दुकानदार ग्राहकों से शुल्क नहीं लेते। हालांकि, कई बार देखा गया है कि कैश के बजाय कार्ड से भुगतान करने पर दुकानदार ग्राहक से 1.5 से 2 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क ले लेते हैं।


UPI के लिए वित्तीय मॉडल की आवश्यकता

वास्तव में, UPI पर अभी तक कोई शुल्क नहीं लिया जाता है, जिससे इसका कोई वित्तीय मॉडल नहीं है। UPI का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, और इसे बनाए रखने के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है। पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने मार्च 2025 में केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा था, जिसमें 'जीरो MDR नीति' पर पुनर्विचार करने की मांग की गई थी। PCI ने यह भी कहा था कि UPI सेवाओं के लिए सालाना लगभग 10,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जबकि सरकार की ओर से मिलने वाला 1500 करोड़ रुपये का इंसेंटिव अपर्याप्त है। इसी कारण PCI ने बड़े व्यवसायों से 0.3 प्रतिशत MDR को मंजूरी देने का प्रस्ताव दिया था।