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UPI लेनदेन पर MDR लागू करने की प्रक्रिया टली, दिवाली के बाद होगा असर

सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है। यह निर्णय त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। व्यापारियों ने इस योजना पर आपत्ति जताई थी, जिससे सरकार ने इसे दिवाली के बाद लागू करने का निर्णय लिया। जानें इस फैसले के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

सरकार ने MDR लागू करने की प्रक्रिया टाली

सरकार ने मंगलवार को 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की योजना को स्थगित कर दिया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने जानकारी दी है कि यह शुल्क दिवाली के बाद लागू होगा, लेकिन नई तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है। पहले MDR लागू करने की समयसीमा 15 अक्टूबर निर्धारित की गई थी। UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने यह निर्णय लिया है कि दशहरा, दीपावली और छठ जैसे त्योहारों के कारण पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI लेनदेन पर MDR दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा।


पहले सरकार की योजना क्या थी?

सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के P2M लेनदेन पर व्यापारियों से MDR वसूलने का निर्णय लिया था, जबकि पर्सन टू पर्सन (P2P) भुगतान मुफ्त रहने वाले थे। व्यापारियों ने इस योजना पर आपत्ति जताई थी, उनका कहना था कि इससे उन पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जबकि वे पहले से ही इनकम टैक्स और GST का भुगतान कर रहे हैं.


क्या यह फैसला पहले से ही टलने वाला था?

इस बदलाव में देरी की संभावना पहले से ही जताई जा रही थी। कई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि सरकार इस योजना को कुछ महीनों के लिए टालने पर विचार कर रही है, और यह जनवरी 2027 तक भी जा सकता था। 15 अक्टूबर की समयसीमा के भीतर ही यह निर्णय लिया जाना था, लेकिन त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ताओं के खर्च में वृद्धि को देखते हुए इसे स्थगित किया गया।


क्यों टला है यह फैसला?

त्योहारी मौसम में लेनदेन की संख्या बढ़ जाती है। व्यापारी आर्थिक बोझ का हवाला देकर इसका विरोध कर रहे थे। पेमेंट कंपनियों को नए सिस्टम को तैयार करने के लिए अधिक समय मिलने की उम्मीद थी। निवेशक इस शुल्क को पेमेंट कंपनियों की संभावित आय का स्रोत मान रहे थे।


MDR क्या होता है?

MDR वह शुल्क है, जो व्यापारी को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर देना होता है। यह आमतौर पर लेनदेन की राशि का एक निश्चित प्रतिशत होता है, जिसे बैंक काटकर शेष राशि व्यापारी के खाते में जमा करता है।


NPCI क्या है?

NPCI भारत में खुदरा भुगतान और सेटलमेंट सिस्टम का संचालन करने वाली संस्था है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय बैंक संघ (IBA) ने स्थापित किया है। यह प्रणाली विश्व स्तर पर प्रशंसा प्राप्त करती है।