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UPI सिस्टम में नया बदलाव: 15 अक्टूबर से लागू होगा MDR चार्ज

15 अक्टूबर से UPI प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है, जिसमें 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.40 प्रतिशत MDR लागू किया जाएगा। यह शुल्क सीधे ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा, बल्कि दुकानदारों पर लागू होगा। जानें MDR का वितरण कैसे होगा और ग्राहकों के लिए क्या राहत उपाय हैं। इस नए नियम का उद्देश्य डिजिटल पेमेंट ढांचे को मजबूत करना और साइबर सुरक्षा में सुधार करना है।
 

UPI में बदलाव की घोषणा


15 अक्टूबर से UPI प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तन होने जा रहा है, जो अब तक जीरो-MDR मॉडल पर कार्यरत थी। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.40 प्रतिशत MDR लागू करने का निर्णय लिया है।


बदलाव का प्रभाव

इस नए नियम के तहत, UPI के माध्यम से होने वाले बड़े कारोबारी लेन-देन पर शुल्क लगाया जाएगा, लेकिन यह राशि सीधे ग्राहकों से नहीं ली जाएगी। इसके लिए दुकानदारों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।


MDR का वितरण

नए MDR से प्राप्त राशि का सबसे बड़ा हिस्सा ग्राहक के बैंक को मिलेगा। NPCI के अनुसार, कुल शुल्क का 40 प्रतिशत उस बैंक को दिया जाएगा, जिसमें ग्राहक का खाता है। इसके बाद 30 प्रतिशत दुकानदार के बैंक को मिलेगा। इस प्रकार, कुल MDR का 70 प्रतिशत दोनों बैंकों के पास जाएगा। UPI ऐप्स को 20 प्रतिशत और Sponsor Banks को 10 प्रतिशत मिलेगा।


उदाहरण के लिए, यदि कोई ग्राहक दुकानदार को UPI के माध्यम से 10,000 रुपये का भुगतान करता है, तो 0.40 प्रतिशत MDR के अनुसार कुल 40 रुपये का शुल्क बनेगा। इसमें ग्राहक के बैंक को 16 रुपये, दुकानदार के बैंक को 12 रुपये, ऐप को 8 रुपये और Sponsor Bank को 4 रुपये मिलेंगे।


ग्राहकों के लिए राहत

नए नियमों के तहत ग्राहकों से MDR वसूलने की अनुमति नहीं होगी। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि दुकानदार इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डालें। UPI ऐप्स को भी कोई अतिरिक्त प्लेटफॉर्म शुल्क नहीं लगाना होगा। आवश्यक सेवाओं जैसे पेट्रोल, ट्रेन टिकट, मोबाइल रिचार्ज और बीमा प्रीमियम पर 5 रुपये का फ्लैट शुल्क रखा गया है। वहीं, कैपिटल मार्केट से जुड़े लेन-देन पर MDR केवल 0.02 प्रतिशत होगा।


डिजिटल पेमेंट में सुधार

UPI लंबे समय से जीरो-MDR व्यवस्था के तहत कार्य कर रहा है। नए शुल्क से प्राप्त राशि का उपयोग डिजिटल पेमेंट ढांचे को मजबूत करने, साइबर सुरक्षा बढ़ाने और छोटे शहरों में नेटवर्क का विस्तार करने में किया जाएगा। इस नए मॉडल में UPI ऐप्स को कमाई का एक नया स्रोत मिलेगा, लेकिन शुल्क के वितरण में सबसे बड़ा हिस्सा बैंकिंग क्षेत्र को प्राप्त होगा।