अडानी समूह और जेबिल की साझेदारी से भारत में एआई उपकरणों का निर्माण
भारत में एआई और डेटा सेंटर के लिए नई साझेदारी
अडानी समूह ने भारत में एआई और डेटा सेंटर से संबंधित उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड और वैश्विक इंजीनियरिंग कंपनी जेबिल इंक ने मिलकर 50:50 की साझेदारी का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य भारत में एआई और डेटा सेंटर के लिए आवश्यक उपकरणों का निर्माण करना है। मंगलवार को इस योजना के लिए एक प्रारंभिक समझौता किया गया।
कंपनियों के अनुसार, यह समझौता अभी प्रारंभिक चरण में है और इसे लागू करने के लिए अंतिम समझौतों पर हस्ताक्षर, आवश्यक अनुमतियां और अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारत में एआई उपकरणों का निर्माण करना है, ताकि न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके, बल्कि अन्य देशों में भी इनकी आपूर्ति की जा सके।
जून 2026 में अडानी समूह और जेबिल ने भारत में एआई और डेटा सेंटर उपकरणों के निर्माण के लिए एक रणनीतिक साझेदारी विकसित करने की योजना बनाई थी। मंगलवार को हुआ समझौता उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस संयुक्त उपक्रम में दोनों कंपनियों की हिस्सेदारी समान रूप से 50 प्रतिशत होगी।
अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने कहा कि एआई के विकास के लिए केवल नए तकनीकी विचार और बेहतर सॉफ्टवेयर ही पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए ऊर्जा, बड़े डेटा सेंटर, आधुनिक कंप्यूटिंग और सटीक मैन्युफैक्चरिंग को एकीकृत करने वाली औद्योगिक व्यवस्था की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अडानी समूह अब केवल एआई से संबंधित सुविधाओं को बिजली और स्थान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि आवश्यक उपकरणों के निर्माण में भी अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है।
इस प्रस्तावित साझेदारी के तहत एआई रैक, सर्वर, स्टोरेज और नेटवर्किंग उपकरणों का निर्माण और असेंबलिंग की जाएगी। सर्वर और स्टोरेज उपकरण डेटा को संग्रहित करने और उस पर तेजी से कार्य करने में मदद करते हैं, जबकि नेटवर्किंग उपकरण विभिन्न प्रणालियों को आपस में जोड़ते हैं। एआई रैक में उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग सिस्टम होते हैं, जो एआई से संबंधित कार्यों और अन्य डिजिटल सेवाओं के संचालन में सहायक होते हैं।
जेबिल इंक के सीईओ माइक दस्तूर ने कहा कि यह समझौता भारत में बड़े पैमाने पर एआई उपकरणों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि जेबिल के 60 वर्षों के इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग अनुभव को अडानी समूह की ऊर्जा और बुनियादी ढांचे की क्षमताओं के साथ मिलाकर बेहतर डेटा सेंटर समाधान विकसित किए जा सकते हैं। इससे भारत और वैश्विक डेटा सेंटर संचालकों की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।
दोनों कंपनियों का अनुमान है कि एआई कंप्यूटिंग में बढ़ते निवेश के कारण अगले 7 वर्षों में इस क्षेत्र में वैश्विक बाजार का अवसर $3 ट्रिलियन से अधिक हो सकता है। यह अनुमान दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में एआई उपकरणों, सर्वर और डेटा सेंटर से संबंधित बुनियादी ढांचे की मांग में तेजी से वृद्धि हो सकती है।
यह योजना अडानी समूह की उस घोषणा से भी संबंधित है, जिसमें उसने 2035 तक हरित ऊर्जा से संचालित 5 गीगावाट क्षमता के एआई के लिए तैयार बड़े डेटा सेंटर विकसित करने के लिए $100 बिलियन निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। प्रस्तावित संयुक्त उपक्रम से समूह के कारोबार में उपकरण निर्माण का एक नया क्षेत्र जुड़ जाएगा, जिससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने, घरेलू मांग को पूरा करने और निर्यात के अवसर तैयार करने में मदद मिलेगी।