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अडानी समूह की बोली को वेदांता की चुनौती खारिज, अधिग्रहण प्रक्रिया में आगे बढ़ा

अनिल अग्रवाल की वेदांता लिमिटेड ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए अडानी समूह की बोली को चुनौती दी थी, जिसे न्यायाधिकरण ने खारिज कर दिया। इस निर्णय के बाद अडानी समूह के लिए अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है। न्यायालय ने वेदांता के तर्कों को अस्वीकार करते हुए कहा कि बोली का मूल्यांकन कई पहलुओं पर आधारित होता है। उच्चतम न्यायालय ने भी इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया था। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।
 

वेदांता की चुनौती असफल

अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांता लिमिटेड ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण के लिए गौतम अडानी समूह की बोली को चुनौती दी थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है।


न्यायाधिकरण का निर्णय

जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण की पीठ, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा शामिल थे, ने कहा कि वेदांता के उठाए गए मुद्दों में कोई ठोस आधार नहीं है। न्यायालय ने यह भी माना कि लेनदारों की समिति ने अडानी समूह की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को प्राथमिकता देने का निर्णय सही समझा।


पहले की मंजूरी

इससे पहले, राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण ने अडानी एंटरप्राइजेज की बोली को मंजूरी दी थी, जिसके खिलाफ वेदांता ने अपील की थी। हालांकि, अपीलीय न्यायाधिकरण ने दोनों याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि प्रक्रिया में कोई अनियमितता नहीं पाई गई।


कर्ज और दिवाला प्रक्रिया

यह मामला तब शुरू हुआ जब जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड पर 57 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो गया था और इसे जून 2024 में दिवाला प्रक्रिया में शामिल किया गया। इस प्रक्रिया में कुल 28 कंपनियों ने रुचि दिखाई, जिनमें से छह अंतिम चरण तक पहुंचीं। अडानी समूह और वेदांता दोनों प्रमुख दावेदार बने।


लेनदारों की समिति का निर्णय

नवंबर 2025 में, लेनदारों की समिति ने लगभग 93.81 प्रतिशत मतों के साथ अडानी समूह की योजना को मंजूरी दी। वहीं, वेदांता ने 16,070 करोड़ रुपये की संशोधित पेशकश दी, जिसे नियमों के तहत स्वीकार नहीं किया गया। समिति ने कहा कि समय सीमा के बाद किसी प्रस्ताव में बदलाव की अनुमति नहीं है।


न्यायाधिकरण का तर्क

वेदांता ने तर्क किया कि उसकी बोली मूल्य के मामले में अधिक थी, लेकिन न्यायाधिकरण ने इसे खारिज करते हुए कहा कि केवल अधिक राशि होना चयन का आधार नहीं हो सकता। बोली का मूल्यांकन कई पहलुओं जैसे नकद भुगतान, व्यवहार्यता और क्रियान्वयन क्षमता के आधार पर किया जाता है।


उच्चतम न्यायालय का हस्तक्षेप

इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने पहले हस्तक्षेप किया था और अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार किया था। हालांकि, उसने निर्देश दिया था कि कोई भी बड़ा निर्णय न्यायाधिकरण की अनुमति से ही लिया जाए।


अडानी समूह के लिए रास्ता साफ

अब इस निर्णय के बाद, जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण का रास्ता अडानी समूह के लिए लगभग साफ हो गया है। हालांकि, वेदांता चाहती है तो उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकती है। कंपनी के पास रियल एस्टेट, सीमेंट, ऊर्जा और आतिथ्य जैसे कई बड़े क्षेत्रों में संपत्तियां हैं, जिनमें ग्रेटर नोएडा और नोएडा के बड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हैं।