अदाणी समूह का कारोबार: कांग्रेस शासित राज्यों में तेजी से विस्तार
अदाणी समूह का बढ़ता कारोबार
नयी दिल्ली, तीन सितंबर: अदाणी समूह ने कांग्रेस और अन्य गैर-भाजपा शासित राज्यों में अपने व्यापार को तेजी से बढ़ाया है। समूह इन क्षेत्रों में सड़क, बंदरगाह, बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा, सीमेंट और डेटा सेंटर जैसी परियोजनाओं पर लगभग पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, अदाणी समूह की परियोजनाओं की सूची अब राजनीतिक सीमाओं से परे बढ़ रही है।
राज्यों में निवेश आकर्षित करना
कर्नाटक, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, बिहार और आंध्र प्रदेश की सरकारें इस समूह से निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं। अदाणी समूह की योजनाओं में भाजपा शासित राज्यों जैसे बिहार और आंध्र प्रदेश भी शामिल हैं। कर्नाटक में, अदाणी एंटरप्राइजेज ने बेंगलुरु में 16.75 किलोमीटर लंबी सुरंग सड़क परियोजना के लिए सबसे कम बोली लगाई है।
महत्वपूर्ण परियोजनाएं
कंपनी ने इस परियोजना के लिए 22,267 करोड़ रुपये की बोली लगाई है, हालांकि ठेके को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। यह परियोजना बेंगलुरु की यातायात समस्या को हल करने में मददगार साबित हो सकती है। अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने हाल ही में कर्नाटक के मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी।
केरल में विकास
केरल में, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकॉनमिक जोन ने विड़िण्गम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह का विकास किया है। यह परियोजना पहले की वाममोर्चा सरकार के समय शुरू हुई थी और वर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आगे बढ़ी। समूह ने इस बंदरगाह के दूसरे चरण में 16,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई है।
तेलंगाना और तमिलनाडु में निवेश
तेलंगाना में, अदाणी समूह ने जनवरी 2024 में 12,400 करोड़ रुपये के निवेश के लिए चार समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। तमिलनाडु में, समूह ने 2024 में 42,700 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए समझौते किए हैं।
आंध्र प्रदेश में अवसर
आंध्र प्रदेश में अदाणी समूह के लिए अवसर और भी बड़े हैं। गूगल ने 2026-2030 के दौरान विशाखापत्तनम में कृत्रिम मेधा केंद्र विकसित करने के लिए 15 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई है। अदाणी समूह कृष्णापत्तनम बंदरगाह और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में भी निवेश कर रहा है।
राजनीतिक सीमाओं से परे विस्तार
सूत्रों के अनुसार, अदाणी समूह की बुनियादी ढांचा महत्वाकांक्षाएं अब केवल भाजपा शासित राज्यों तक सीमित नहीं हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की सरकारें भी समूह के साथ बड़े पैमाने पर निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सहयोग कर रही हैं।