अमेरिका-ईरान तनाव से सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, जानें ताजा रेट्स
वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का असर
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक संकट के कारण निवेशक और ट्रेडर्स सतर्कता बरत रहे हैं, जिसका प्रभाव कमोडिटी मार्केट पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। भारी बिकवाली के चलते घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर दोनों कीमती धातुओं के वायदा भाव लाल निशान पर कारोबार कर रहे हैं।
MCX पर सोने और चांदी में गिरावट
MCX पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1,952 रुपये की गिरावट के साथ 1,40,450 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। हालांकि, इसके बाद इसमें थोड़ी सुधार देखने को मिली और यह लगभग 1 प्रतिशत या 1,278 रुपये की कमी के साथ 1,41,124 रुपये पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान सोने ने 1,41,501 रुपये का उच्चतम स्तर भी छुआ। वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी में भी 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जिससे चांदी का वायदा 2,387 रुपये गिरकर 2,20,247 रुपये प्रति किलोग्राम के इंट्राडे लो पर पहुंच गया। बाद में यह 2,21,715 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही।
भारत के प्रमुख शहरों में सोने के भाव
2 जुलाई को भारत के विभिन्न महानगरों और प्रमुख शहरों में सोने की कीमतें भिन्न-भिन्न रहीं। चेन्नई में 24 कैरेट सोना 14,456 रुपये, 22 कैरेट 13,251 रुपये और 18 कैरेट 11,071 रुपये प्रति ग्राम पर रहा। नई दिल्ली में 24 कैरेट के दाम 14,092 रुपये, 22 कैरेट के 12,919 रुपये और 18 कैरेट के 10,573 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किए गए। मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद और केरल में भी कीमतें समान रहीं, जहां 24 कैरेट सोना 14,077 रुपये, 22 कैरेट 12,904 रुपये और 18 कैरेट 10,558 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा था।
चांदी की ताजा कीमतें
सोने के साथ-साथ चांदी के खुदरा बाजारों में भी गतिविधियाँ तेज हैं। वर्तमान में भारत में चांदी की कीमत 240.10 रुपये प्रति ग्राम और 2,40,100 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की कीमतें सोने की तुलना में कम होती हैं, लेकिन भारतीय निवेशकों और आभूषण खरीदारों के बीच इसकी मांग हमेशा मजबूत रहती है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव केवल अंतरराष्ट्रीय तनावों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि औद्योगिक मांग भी घरेलू और वैश्विक बाजारों में कीमतों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वैश्विक अस्थिरता के कारण आने वाले दिनों में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।