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अमेरिका-ईरान संघर्ष में राहत: तेल की कीमतों में गिरावट का बड़ा असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अचानक आई राहत ने वैश्विक बाजारों को झकझोर कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले को दो हफ्तों के लिए रोकने की घोषणा के बाद, तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 109.77 डॉलर से घटकर 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इस लेख में जानें कि कैसे यह स्थिति वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर रही है और क्या यह सीजफायर स्थायी हो सकता है।
 

तेल बाजार में अचानक गिरावट


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अचानक आई राहत ने वैश्विक बाजारों को झकझोर कर रख दिया. जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले को दो हफ्तों के लिए रोकने का ऐलान किया, तेल बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली. यह बदलाव इतना तेज था कि कुछ ही घंटों में कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया.


ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट

ट्रंप के इस फैसले के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत तेजी से नीचे आई. पहले यह 109.77 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर थी, जो गिरकर करीब 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. इसी तरह, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में भी लगभग 20 डॉलर प्रति बैरल की कमी दर्ज की गई. यह गिरावट इस उम्मीद के कारण आई कि लंबे समय से बाधित तेल आपूर्ति अब फिर से सामान्य हो सकती है. निवेशकों ने इसे सकारात्मक संकेत के रूप में लिया और बाजार में तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिली.


बाजार में व्यापक प्रभाव

बाजार में तुरंत असर


इस घोषणा का असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहा. कुछ ही मिनटों में वैश्विक बाजारों में बदलाव दिखने लगा. तेल की कीमतें नीचे आईं, जबकि बॉंड की कीमतें बढ़ गईं. साथ ही अमेरिकी शेयर बाजार में भी उछाल दर्ज किया गया. निवेशकों को लगा कि अगर युद्धविराम सफल रहता है, तो ऊर्जा आपूर्ति पर बना दबाव कम होगा और आर्थिक स्थिति में सुधार आ सकता है.


कीमतों में वृद्धि का कारण

पहले क्यों बढ़ी थीं कीमतें?


तेल की कीमतों में हालिया तेजी की मुख्य वजह अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले थे, जो 28 फरवरी से जारी थे. इन हमलों के चलते ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण सख्त करना पड़ा. इसका सीधा असर यह हुआ कि तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई. इसके अलावा, बीमा लागत भी काफी बढ़ गई, जिससे तेल का व्यापार और महंगा हो गया. इन कारणों से मार्च महीने में तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई, जो एक असामान्य उछाल था.


महंगाई का खतरा

वहीं, तेल की बढ़ती कीमतों ने कई देशों में महंगाई का खतरा बढ़ा दिया था. सरकारों और कंपनियों को ऊर्जा की बढ़ती लागत से निपटना मुश्किल हो रहा था. कई जगहों पर ईंधन की कीमतों में तेजी से वृद्धि होने लगी थी, जिससे आम लोगों पर भी असर पड़ने लगा.


होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत


होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. यहां से हर दिन दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई होती है. यह रास्ता सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, इराक और ईरान जैसे देशों के लिए बेहद अहम है. इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ता है. यही वजह है कि इसके बंद होने की आशंका भर से ही कीमतों में उछाल आ जाता है.


सीजफायर की स्थिति

2 हफ्तों का सीजफायर


ट्रंप के बयान के बाद ईरान ने भी संकेत दिया है कि यदि हमले रुकते हैं, तो वह दो सप्ताह तक इस जलमार्ग को सुरक्षित रूप से खुला रख सकता है. इससे तेल टैंकरों की आवाजाही फिर से शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है. हालांकि, यह व्यवस्था अस्थायी है और पूरी तरह से दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत पर निर्भर करती है.


यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह युद्धविराम सिर्फ दो सप्ताह के लिए है. इसके आगे क्या होगा, यह अभी साफ नहीं है. विश्लेषकों का मानना है कि यदि बातचीत सफल नहीं होती, तो हालात फिर से बिगड़ सकते हैं. फिलहाल, बाजार इस राहत को सकारात्मक संकेत मान रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि तेल संकट का सबसे कठिन दौर अब पीछे छूट चुका है.