अमेरिका-ईरान संघर्ष से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव
अर्थव्यवस्था पर संकट
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक आर्थिक संतुलन को संकट में डाल दिया है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों में हलचल मची है। भारत सहित कई देशों के आयात-निर्यात पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिसके चलते विश्व बैंक ने गंभीर चेतावनी जारी की है।
विश्व बैंक की चेतावनी
विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने कहा है कि इस संघर्ष का आर्थिक प्रभाव युद्ध समाप्त होने के बाद भी लंबे समय तक बना रहेगा। उन्होंने कहा, 'यह केवल शुरुआत है, युद्ध खत्म होने के बाद स्थिति और भी बिगड़ सकती है।' बंगा ने यह भी स्पष्ट किया कि एक तात्कालिक और स्थायी युद्धविराम भी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में मंदी को रोकने में सक्षम नहीं होगा।
विकास दर में गिरावट
विश्व बैंक के अनुसार, यदि युद्धविराम कायम रहता है, तो वैश्विक विकास दर में 0.3 से 0.4 प्रतिशत की कमी आ सकती है। लेकिन यदि संघर्ष फिर से भड़कता है, तो यह गिरावट 1 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, जिसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजारों और वित्तीय प्रणालियों पर पड़ेगा।
महंगाई का बढ़ता खतरा
महंगाई का बढ़ता दबाव और विकासशील देशों की चिंता
आर्थिक मंदी के साथ-साथ महंगाई का दबाव भी बढ़ने की संभावना है। बंगा ने कहा कि युद्धविराम की स्थिति में वैश्विक महंगाई 200 से 300 आधार अंकों तक बढ़ सकती है। यदि संघर्ष लंबा चलता है, तो यह 0.9 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। विकासशील देशों के लिए यह स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां महंगाई 6.7% तक पहुंच सकती है।
सरकारों के लिए सलाह
सरकार को सब्सिडी के जाल से बचने की सलाह
विश्व बैंक ने ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों को 'इमरजेंसी फंड' उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बंगा ने सरकारों को चेतावनी दी है कि उन्हें अस्थिर ऊर्जा सब्सिडी में नहीं फंसना चाहिए, जो दीर्घकाल में राजकोषीय अस्थिरता पैदा कर सकती है।
वैकल्पिक ऊर्जा का महत्व
वैकल्पिक ऊर्जा ही एकमात्र स्थायी समाधान
बंगा ने कहा कि जो देश अपनी ऊर्जा जरूरतों में विविधता लाने में असफल रहेंगे, उन्हें भविष्य में गंभीर आर्थिक अस्थिरता का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने नाइजीरिया की 20 अरब डॉलर की रिफाइनरी परियोजना का उदाहरण दिया, जो घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में सफल रही है। उनके अनुसार, परमाणु, जल, भूतापीय, पवन और सौर ऊर्जा जैसे वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देना दीर्घकालिक समाधान है।