अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता: तेल की कीमतों में गिरावट
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम
अमेरिका और ईरान ने अगले 60 दिनों के लिए एक-दूसरे पर हमले न करने का निर्णय लिया है। दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम समझौते पर सहमति बन गई है। इस शांति वार्ता के सकारात्मक परिणाम के चलते, सोमवार को तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत तक की कमी आई। यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद आई है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
समझौते की जानकारी
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि अमेरिका और ईरान शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर करेंगे। इस समझौते में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने का निर्णय शामिल है। यदि यह समझौता सफल रहता है, तो वैश्विक तेल की कीमतों में और गिरावट आ सकती है, जिससे महंगाई में कमी आएगी।
समझौते के मुख्य बिंदु
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट 'टोल फ्री' रहेगा और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को हटा लिया जाएगा। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि ड्राफ्ट डील के अनुसार, 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को ईरानी नियंत्रण में फिर से खोला जाएगा। पिछले चार महीनों से युद्ध के कारण यह जलमार्ग बंद था, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई थी।
तेल की कीमतों पर प्रभाव
ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.58 डॉलर गिरकर 83.75 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 4.01 डॉलर गिरकर 80.87 डॉलर पर पहुंच गया।
कीमतों में गिरावट का कारण
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव में कमी के कारण खतरा भी कम हुआ है। यही कारण है कि तेल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। अगले 60 दिनों में स्थायी समझौते पर और बातचीत की जाएगी, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा होगी।
दुनिया के लिए राहत
ईरान के पड़ोसी देश जल्द से जल्द तेल उत्पादन शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले एक साल से डोनाल्ड ट्रंप के कारण बाजार में अस्थिरता रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से तेल की आपूर्ति फिर से शुरू होगी। यदि युद्ध से पहले के 60 से 70 प्रतिशत हिस्से तक आपूर्ति शुरू हो जाती है, तो यह दुनिया के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।