अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पर रोक से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा ने कच्चे तेल की कीमतों में अचानक गिरावट ला दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है, जो पहले 109 डॉलर से अधिक था। इस स्थिति का प्रभाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है, खासकर होरमुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष समाप्त होता है, तो ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौट सकती है। जानें इस विषय पर और क्या हो रहा है।
Apr 8, 2026, 21:55 IST
कच्चे तेल की कीमतों में अचानक गिरावट
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका द्वारा सैन्य कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा ने कच्चे तेल की कीमतों पर सीधा प्रभाव डाला है।
हालिया आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक गिरकर लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जबकि इससे पहले यह 109 डॉलर से ऊपर थी। इसी तरह, अन्य प्रमुख कच्चे तेल सूचकांक में भी लगभग 20 डॉलर प्रति बैरल की कमी देखी गई है।
यह गिरावट तब आई जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ हमलों पर दो सप्ताह के लिए रोक लगाने की घोषणा की। इस निर्णय के साथ ही फारस की खाड़ी का महत्वपूर्ण जलमार्ग, होरमुज जलडमरूमध्य, फिर से खुलने की संभावना जताई गई है।
होरमुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से प्रतिदिन वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20% गुजरता है। इस मार्ग के बंद होने या बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के कारण स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी। इसके परिणामस्वरूप, ईरान ने इस जलमार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था, जिससे तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई और बीमा लागत में तेजी आई।
इस कारण मार्च में कच्चे तेल की कीमतों में 50% से अधिक की वृद्धि हुई थी, जो अब तक की सबसे बड़ी मासिक वृद्धि मानी जा रही है। इस वृद्धि ने वैश्विक महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं और कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव डाला था।
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित दीर्घकालिक समझौते की चर्चा भी चल रही है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि शांति के लिए बातचीत जारी है, जबकि ईरान ने संकेत दिया है कि यदि हमले रुकते हैं, तो वह दो सप्ताह तक इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर सकता है।
जैसे ही इन संकेतों की जानकारी बाजार में आई, निवेशकों ने अपने जोखिम वाले सौदों को कम करना शुरू कर दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि तेल की कीमतें गिर गईं, जबकि शेयर बाजार में तेजी और बांड बाजार में मजबूती देखने को मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष पूरी तरह समाप्त होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि, स्थिति अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और बाजार की नजर आगे के घटनाक्रम पर बनी हुई है।