×

अमेरिका-चीन के बीच एआई प्रतिस्पर्धा: राजनीतिक बयानबाजी का नया दौर

अमेरिका और चीन के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर प्रतिस्पर्धा अब राजनीतिक बयानबाजी में बदल गई है। डारियो अमोदेई की अपील पर चीन ने प्रतिक्रिया दी है, जबकि दोनों देशों के बीच एआई के नियमन पर चर्चा की संभावना है। इस प्रतिस्पर्धा का वैश्विक सुरक्षा और सहयोग पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। जानें इस मुद्दे की पूरी जानकारी और इसके संभावित परिणाम।
 

एआई में अमेरिका और चीन की बढ़ती प्रतिस्पर्धा

अमेरिका और चीन के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा अब राजनीतिक और कूटनीतिक बयानों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। चीन के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई की उस अपील की आलोचना की, जिसमें उन्होंने अमेरिका से चीन की एआई क्षमताओं को सीमित करने की मांग की है।


जानकारी के अनुसार, अमोदेई ने शनिवार को एक लेख में चीन के एआई क्षेत्र में अमेरिका से आगे निकलने को गंभीर खतरा बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए चीन को अत्याधुनिक एआई चिप्स और उनके निर्माण उपकरणों की बिक्री पर पाबंदियां जारी रखनी चाहिए।


इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि सभी देशों को मिलकर एआई के विकास को आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि डर का माहौल बनाना और प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना वैश्विक एआई शासन की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाएगा।


चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने भी अमोदेई के लेख को चीन को रोकने की अप्रत्यक्ष कोशिश बताया। अखबार के अनुसार, लेख भले ही वैश्विक एआई सुरक्षा पर केंद्रित हो, लेकिन इसमें चीन को निशाना बनाने वाले कई प्रस्ताव शामिल हैं। इसे एआई के क्षेत्र में शीत युद्ध की रणनीति के रूप में देखा गया है।


यह ध्यान देने योग्य है कि एआई के क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। अमेरिका ने चीन की पहुंच को सीमित करने के लिए प्रयास किए हैं, जबकि चीन अपनी घरेलू कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रहा है।


चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका के आरोपों को निराधार बताया है। मंत्रालय ने कहा कि कई कंपनियां एआई मॉडल से जानकारी निकालकर अन्य मॉडल को प्रशिक्षित करने की तकनीक का उपयोग करती हैं। चीन ने अमेरिका पर एआई उद्योग में एकाधिकार स्थापित करने का आरोप भी लगाया है।


हाल के वर्षों में, चीनी कंपनियों ने कई शक्तिशाली एआई मॉडल विकसित किए हैं, जिनकी लागत कई अमेरिकी प्रणालियों की तुलना में कम है। कुछ आकलनों में उनकी क्षमता भी अमेरिकी मॉडलों के बराबर मानी गई है, जिससे वैश्विक एआई बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हुई है।


इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की 24 सितंबर को प्रस्तावित बैठक पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बैठक में एआई के नियमन और सुरक्षा पर चर्चा हो सकती है। यदि दोनों देश इस क्षेत्र में किसी साझा व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो इसका वैश्विक प्रभाव हो सकता है।


चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पहले ही विकासशील देशों के बीच एआई के लिए वैश्विक शासन व्यवस्था बनाने की वकालत की है। चीन खुद को ओपन-सोर्स एआई व्यवस्था विकसित करने में अग्रणी के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।


चीन के राज्य सुरक्षा मंत्रालय के प्रमुख ने भी एआई से जुड़े सुरक्षा जोखिमों की रोकथाम और प्रबंधन के लिए व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई है। इस प्रकार, अमेरिका तकनीकी बढ़त और सुरक्षा को लेकर चीन पर नियंत्रण चाहता है, जबकि चीन वैश्विक सहयोग और अपने वैकल्पिक तकनीकी ढांचे की पैरवी कर रहा है। आने वाले समय में यह प्रतिस्पर्धा तकनीक के साथ वैश्विक राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाली बड़ी चुनौतियां बन सकती है।