अमेरिकी टैरिफ का भारत पर प्रभाव: दीर्घकालिक असर नहीं होगा
भारतीय अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव
भारतीय सरकार के जीएसटी सुधारों से मिलेगी गति
अमेरिका द्वारा लागू की गई नई टैरिफ दरों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव स्पष्ट है। शेयर बाजार में गिरावट के साथ, केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ से भारत का 4.22 लाख करोड़ रुपये का निर्यात प्रभावित होगा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
जीएसटी सुधारों का महत्व
फिच सॉल्यूशंस की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के टैरिफ का भारत पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) में सुधार से टैक्स दरें कम होंगी, जिससे खपत में वृद्धि होगी। इससे अमेरिका के टैरिफ दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। जीएसटी सुधार और हालिया आयकर कटौती से खपत में 5.31 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हो सकती है।
भारत की जीडीपी पर संभावित प्रभाव
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अमेरिकी टैरिफ के कारण वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि में 0.2% की कमी आ सकती है। इसलिए, फिच ने अपने पूर्वानुमान को संशोधित किया है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 में 5.8% और 2026-27 में 5.4% की वृद्धि का अनुमान है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत इस दशक (2019-2029) में एशिया की सबसे तेजी से बढ़ती उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा, और इस दौरान जीडीपी विकास दर 6% से थोड़ी अधिक रहेगी।
आर्थिक मजबूती के संकेत
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। सरकार लगातार अपने खर्चों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, जिसे फिस्कल कंसॉलिडेशन कहा जाता है। इसके अलावा, भारत का आर्थिक विकास भी तेजी से हो रहा है, जो इस अपग्रेड का एक बड़ा कारण है।