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अल्ट्राटेक सीमेंट के तार और केबल कारोबार में प्रवेश से शेयरों में गिरावट

अल्ट्राटेक सीमेंट ने तार और केबल कारोबार में प्रवेश किया है, जिससे शेयर बाजार में अन्य कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है। इस नए कारोबार के लिए कंपनी ने 1,800 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई है। जानें कि कैसे यह कदम बाजार में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है और अल्ट्राटेक के भविष्य की संभावनाएं क्या हैं।
 

शेयर बाजार में गिरावट का कारण

शुक्रवार को तार और केबल कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण आदित्य बिड़ला समूह की अल्ट्राटेक सीमेंट का इस क्षेत्र में औपचारिक प्रवेश माना जा रहा है। अल्ट्राटेक ने अपने नए कारोबार का नाम 'अल्ट्रावोल्ट' रखा है, जिससे पहले से स्थापित कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना उत्पन्न हो गई है.


शेयरों में गिरावट के आंकड़े

4 सितंबर को केईआई इंडस्ट्रीज के शेयरों में लगभग 8.1 प्रतिशत की गिरावट आई, जो 4,895.50 रुपये तक पहुंच गए। वी-मार्क इंडिया के शेयर 7.37 प्रतिशत गिरकर 323 रुपये पर आ गए। आरआर केबल के शेयर 6.83 प्रतिशत की कमी के साथ 2,439 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। पॉलीकैब इंडिया के शेयरों में भी 5.78 प्रतिशत की गिरावट आई, जो 8,298 रुपये तक पहुंच गए.


अन्य कंपनियों की स्थिति

फिनोलेक्स केबल्स में 2.55 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे इसका शेयर 1,231.70 रुपये पर आ गया। यूनिवर्सल केबल्स के शेयर 3.07 प्रतिशत गिरकर 1,576.90 रुपये पर पहुंच गए। हवेल्स इंडिया का शेयर भी लगभग 4 प्रतिशत नीचे 1,152 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था.


अल्ट्राटेक सीमेंट की स्थिति

इसके विपरीत, अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर में हल्की बढ़त देखी गई। दोपहर के कारोबार में कंपनी का शेयर 0.22 प्रतिशत बढ़कर 11,300 रुपये के आसपास पहुंच गया। साल 2026 तक अल्ट्राटेक के शेयर में लगभग 5.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 में 8.4 प्रतिशत की गिरावट आई है.


निवेश की योजना

अल्ट्राटेक ने तार और केबल कारोबार में 1,800 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई है। कंपनी ने पहले दिसंबर के अंत तक इस कारोबार को शुरू करने का संकेत दिया था, लेकिन उसने समय से पहले ही अल्ट्रावोल्ट को बाजार में उतार दिया। जून तक कंपनी ने इस योजना पर लगभग 890 करोड़ रुपये खर्च कर दिए थे.


विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों की नजर इस बात पर है कि अल्ट्राटेक अपने वितरण नेटवर्क का उपयोग इस नए कारोबार में कितनी तेजी से कर पाती है। कंपनी ने अगले पांच वर्षों में देश की दो प्रमुख तार और केबल कंपनियों में शामिल होने का लक्ष्य रखा है.


भविष्य की संभावनाएं

जेफरीज का अनुमान है कि अल्ट्राटेक का तार और केबल कारोबार वित्त वर्ष 2030 तक उसके कुल राजस्व और परिचालन लाभ में 3 से 7 प्रतिशत तक योगदान कर सकता है। अल्ट्रावोल्ट की शुरुआत तार और कम वोल्टेज वाली केबल से होगी, जिसका उत्पादन गुजरात के झगड़िया स्थित संयंत्र में किया जाएगा.


बाजार में प्रतिस्पर्धा

तार और केबल बाजार में पॉलीकैब इंडिया, केईआई इंडस्ट्रीज, आरआर केबल और फिनोलेक्स केबल्स जैसी कंपनियों की मजबूत उपस्थिति है। अल्ट्राटेक का बड़ा निवेश और व्यापक वितरण नेटवर्क इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा सकता है.