असम के मुख्यमंत्री की चाय बागान मालिकों को चेतावनी: मजदूरों को जमीन का अधिकार जरूरी
चाय बागान मालिकों को चेतावनी
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बृहस्पतिवार को चाय बागान मालिकों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वे अपने श्रमिकों को भूमि का अधिकार देने से इनकार करते हैं, तो सरकार उनकी वित्तीय सहायता को वापस ले सकती है।
मुख्यमंत्री ने नतुन दिनेर आलाप कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार ने नवंबर में विधानसभा के शीतकालीन सत्र में चाय बागान श्रमिकों को घर और भूमि का मालिकाना हक देने के लिए एक कानून पारित किया था।
उन्होंने कहा, “चाय बागान मालिकों की प्रतिक्रिया इस मामले में सकारात्मक नहीं रही है। जो लोग सरकार के साथ सहयोग नहीं करेंगे, उनकी सहायता वापस ले ली जाएगी।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार हर साल चाय बागानों को लगभग 150 करोड़ रुपये की सहायता देती है, और यदि मालिक अदालत का सहारा लेते हैं या किसी प्रकार की बाधा डालने का प्रयास करते हैं, तो सरकार इस सहायता पर पुनर्विचार कर सकती है।
उन्होंने कहा, “चाय उद्योग के 200 वर्षों के बाद अब श्रमिकों का अधिकार है कि उन्हें अपनी भूमि का पूर्ण मालिकाना हक मिले।” उन्होंने यह भी दावा किया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और श्रमिकों को उनका हक मिलेगा।
शर्मा ने कहा कि ‘असम फिक्सेशन ऑफ सीलिंग ऑफ लैंड होल्डिंग्स (संशोधन) कानून, 2025’ का उद्देश्य अन्याय को समाप्त करना है। यह कानून उन श्रमिकों को भूमि का अधिकार देने के लिए बनाया गया है, जो पिछले 200 वर्षों से चाय बागानों में कार्यरत हैं।
हालांकि, कांग्रेस के असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने इस निर्णय पर संदेह व्यक्त किया और सवाल उठाया कि चुनाव से केवल चार महीने पहले यह कानून क्यों लाया गया।