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आंध्र प्रदेश में 28,000 परिवारों को आवासीय भूखंडों का स्वामित्व मिला

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने विशाखापत्तनम में 28,000 परिवारों को आवासीय भूखंडों का स्वामित्व सौंपा। इस योजना के तहत लगभग 9,000 करोड़ रुपये की भूमि का कानूनी अधिकार दिया गया है, जिससे पिछले चार दशकों से स्वामित्व का इंतजार कर रहे परिवारों को राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों को स्वामित्व दस्तावेज भी सौंपे और अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी भूमि पर बने मकानों का नियमितीकरण किया जाए।
 

मुख्यमंत्री नायडू की ऐतिहासिक पहल

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को विशाखापत्तनम में एक महत्वपूर्ण और कल्याणकारी योजना का उद्घाटन किया, जिसके तहत 28,000 से अधिक परिवारों को आवासीय भूखंडों का पूर्ण स्वामित्व प्रदान किया गया। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार ने लगभग 9,000 करोड़ रुपये की भूमि का कानूनी अधिकार लाभार्थियों को सौंपा है। यह कदम उन हजारों परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, जो पिछले 40 वर्षों से अपनी भूमि पर स्वामित्व का इंतजार कर रहे थे।


भूमि का नियमितीकरण और लाभार्थियों को दस्तावेज

इस योजना के अंतर्गत 399 एकड़ भूमि का नियमितीकरण किया जा रहा है, जिसमें 19.3 लाख वर्ग गज से अधिक क्षेत्र शामिल है। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी, जो चार दशकों से स्वामित्व अधिकार की प्रतीक्षा कर रहे थे। नायडू ने कुछ लाभार्थियों को स्वामित्व दस्तावेज भी सौंपे। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, "विशाखापत्तनम में इस स्तर पर आवासीय भूखंडों का नियमितीकरण और स्वामित्व दस्तावेजों का वितरण पहली बार किया जा रहा है।"


आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का आश्वासन

बंदरगाह शहर में हजारों परिवार ऐसे घरों में रह रहे थे, जिन्हें उन्होंने स्वयं बनाया था, लेकिन उनके पास भूमि पर कानूनी अधिकार नहीं था। आधिकारिक बयान में बताया गया कि स्वामित्व दस्तावेजों की कमी के कारण वे अपनी संपत्तियों का सही उपयोग नहीं कर पा रहे थे। इस समस्या का समाधान करते हुए गठबंधन सरकार ने स्वामित्व अधिकार प्रदान किए हैं, जिससे लाभार्थियों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलेगी और वे अपनी संपत्तियों को अपने बच्चों को विरासत में दे सकेंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि सरकारी भूमि पर कोई आपत्ति नहीं है, तो वहां के मकानों का नियमितीकरण किया जाए और निवासियों को स्वामित्व अधिकार दिए जाएं।