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आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बिक्री पर कांग्रेस-भाजपा के बीच तीखी बहस

आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बिक्री को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी बहस चल रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस की पिछली सरकारों पर बैंकों में राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। राहुल गांधी ने बैंक कर्मचारियों के समर्थन में आवाज उठाई है, जबकि सरकार ने बिक्री प्रक्रिया को रणनीतिक पुनर्गठन बताया है। जानें इस विवाद के पीछे के कारण और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बारे में।
 

कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग

आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बेचने के केंद्र सरकार के निर्णय पर कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कांग्रेस की पिछली सरकारों पर आरोप लगाया कि उन्होंने बैंकों के संचालन में राजनीतिक हस्तक्षेप किया और कर्ज वितरण में नियमों का उल्लंघन किया। उन्होंने कहा कि जब एनडीए सरकार सत्ता में आई, तब आईडीबीआई बैंक की स्थिति बहुत खराब थी।


वित्त मंत्री का आरोप

कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा बैंक की बिक्री का विरोध किए जाने के बाद, वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकारों ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों का निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल किया। बैंक कर्मचारियों पर राजनीतिक आधार पर कर्ज देने का दबाव बनाया गया और कई मामलों में कर्ज देने के नियमों की अनदेखी की गई।


पुराने मामलों का जिक्र

निर्मला सीतारमण ने अपने आरोपों को मजबूत करने के लिए कई ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 1957 में कांग्रेस नेताओं के प्रभाव के कारण हरिदास मूंदड़ा को भारतीय जीवन बीमा निगम से धन मिला था। इसके अलावा, 1976 में इंदिरा गांधी की सरकार ने भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष आरके तलवार को पद से हटा दिया था, क्योंकि उन्होंने संजय गांधी के करीबी लोगों को कर्ज देने के नियमों में ढील देने के लिए दबाव को स्वीकार नहीं किया।


संजय गांधी का दबाव

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि संजय गांधी ने मारुति के लिए कर्ज दिलाने के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर दबाव डाला था। इसके अलावा, इंदिरा और राजीव गांधी की सरकारों में वित्त राज्य मंत्री रहे बी. जनार्दन पुजारी पर भी बैंक कर्मचारियों से कर्ज जारी करवाने का दबाव बनाने का आरोप लगाया गया।


बैंक की खराब स्थिति

निर्मला सीतारमण ने आईडीबीआई बैंक की खराब स्थिति के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बैंक को वीडियोकॉन, विनसम, एबीजी शिपयार्ड और किंगफिशर जैसे बड़े समूहों को कर्ज देने के लिए मजबूर किया गया, जिसके परिणामस्वरूप बैंक को भारी नुकसान उठाना पड़ा। सरकार ने इन खराब कर्जों को पहचानकर बैंक की स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाए।


राहुल गांधी का समर्थन

इससे पहले, राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के समर्थन में एक पत्र साझा किया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में देश के उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए आईडीबीआई की स्थापना की गई थी, जबकि वर्तमान सरकार बैंक को बेचने की प्रक्रिया में जुटी है। उन्होंने बैंक कर्मचारियों के साथ खड़े होने की बात कही।


सरकार का बयान

केंद्र सरकार ने एक दिन पहले बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को रणनीतिक पुनर्गठन बताया था। सरकार का कहना है कि बिक्री की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार और संबंधित सरकारी समितियों की मंजूरी के बाद शुरू की गई है। प्रस्ताव के तहत बैंक की हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की एक सहायक कंपनी को बेची जाएगी।


राजनीतिक टकराव

यह राहुल गांधी और निर्मला सीतारमण के बीच तीन दिनों में दूसरा बड़ा राजनीतिक टकराव है। इससे पहले, टाटा समूह के विवाद को लेकर दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी हुई थी। राहुल ने आरोप लगाया था कि सरकार टाटा समूह को नुकसान पहुंचाने की अनुमति दे रही है, जिस पर वित्त मंत्री ने उन्हें हर कारोबारी मामले को राजनीति से अलग रखने की सलाह दी थी। इस प्रकार, आईडीबीआई बैंक की बिक्री का मुद्दा अब बैंक कर्मचारियों के भविष्य के साथ-साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया है।