आईडीबीआई बैंक के निजीकरण का विरोध: बैंक कर्मचारियों की मांग
बैंक कर्मचारियों का विरोध
बैंक कर्मचारी संगठनों ने आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के निर्णय का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की अपील की है। उनका कहना है कि विदेशी निवेशकों को बैंक में हिस्सेदारी बेचने से सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग प्रणाली कमजोर होगी। ‘ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन’ (एआईबीईए) ने एक बयान में कहा कि बैंक की हिस्सेदारी बेचना उचित नहीं है, क्योंकि यह पहले की वित्तीय समस्याओं से उबर चुका है और हाल के वर्षों में अच्छा लाभ कमा रहा है।
सरकार की हिस्सेदारी
वर्तमान में, केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के पास आईडीबीआई बैंक की लगभग 94 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को लगभग 53,000 करोड़ रुपये (5.5 अरब अमेरिकी डॉलर) में आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दी है। सरकार इसे रणनीतिक पुनर्गठन के रूप में देख रही है।
संगठनों की चिंताएं
सरकार का कहना है कि हिस्सेदारी बिक्री के बाद भी केंद्र और एलआईसी की बैंक में कुल 34 प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रहेगी। संगठनों का दावा है कि आईडीबीआई के आईडीबीआई बैंक में विलय के समय सरकार ने संसद को आश्वासन दिया था कि उसकी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से कम नहीं होगी। प्रस्तावित निजीकरण इस आश्वासन के खिलाफ है।
बैंक का लाभ
यूनियन के अनुसार, आईडीबीआई बैंक ने पिछले तीन वर्षों में क्रमशः 5,600 करोड़ रुपये, 7,500 करोड़ रुपये और 9,500 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। बैंक में आम लोगों की लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि है। संगठन ने चिंता जताई है कि इस बिक्री के परिणामस्वरूप विदेशी निवेशक सार्वजनिक बचत की एक बड़ी राशि पर नियंत्रण प्राप्त कर लेंगे।