आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री के खिलाफ कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त
हड़ताल का समापन और आगे की रणनीति
नई दिल्ली, 3 नवंबर: आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी की बिक्री के खिलाफ बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों के संयुक्त मंच द्वारा आयोजित दो दिवसीय हड़ताल मंगलवार को समाप्त हो गई। सरकार ने आईडीबीआई बैंक की बहुलांश हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स कंपनी को बेचने का निर्णय लिया है, जिसका विरोध बैंक कर्मचारी कर रहे हैं।
संघ की बैठक और आगे की योजना
बैंक कर्मचारी संघ ने हिस्सेदारी बिक्री को रोकने के लिए अपनी आगे की रणनीति 10 नवंबर को होने वाली बैठक में तय करने का निर्णय लिया है। आईडीबीआई अधिकारियों और कर्मचारियों के संयुक्त मंच के संयोजक देविदास तुलजापुरकर ने बताया कि देशभर में कर्मचारियों और अधिकारियों ने हड़ताल को व्यापक समर्थन दिया। दिवाली के बाद होने वाली बैठक में संघर्ष को तेज करने के तरीकों पर चर्चा की जाएगी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने भी आईडीबीआई बैंक के मूल्यांकन पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि आईडीबीआई बैंक का विनिवेश एक घोटाला है और इसकी प्रक्रिया की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित करने की मांग की है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि एक विदेशी कंपनी बैंक के पैसे का उपयोग करके सरकार से आईडीबीआई बैंक का अधिग्रहण कर रही है।
सरकार से पारदर्शिता की मांग
तुलजापुरकर ने सरकार से मूल्यांकन की प्रक्रिया, अनुमानों और संपत्तियों के मूल्यांकन के तरीके का खुलासा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी राष्ट्रीय संपत्ति को कम कीमत पर नहीं बेचा जा रहा है। इसके अलावा, प्रस्तावित खरीदार की वित्तीय स्थिति और नियामकीय रिकॉर्ड की पारदर्शी जांच की जानी चाहिए।
आईडीबीआई बैंक की स्थिति
आईडीबीआई बैंक में कुल 19,108 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के 9,500 कर्मचारी शामिल हैं। केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के पास आईडीबीआई बैंक की क्रमशः 45.48 प्रतिशत और 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
हिस्सेदारी बिक्री का विवरण
सरकार ने 14 अक्टूबर को आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को लगभग 53,000 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दी थी। फेयरफैक्स सरकार की 30.48 प्रतिशत और एलआईसी की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी। यह सौदा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मंजूरी पर निर्भर है।