आयकर रिटर्न दाखिल करते समय टैक्स बचाने के 6 महत्वपूर्ण डिडक्शन
टैक्स बचत के लिए महत्वपूर्ण डिडक्शन
नई दिल्ली: आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरते समय, अधिकांश लोग अपनी आय और टैक्स की जानकारी सही तरीके से प्रस्तुत करते हैं, लेकिन कई बार वे कुछ महत्वपूर्ण टैक्स डिडक्शन का दावा करना भूल जाते हैं। इससे करदाता अधिक टैक्स चुकाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। यदि आप वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आईटीआर दाखिल करने जा रहे हैं और पुरानी टैक्स व्यवस्था का चयन किया है, तो कुछ महत्वपूर्ण डिडक्शन का लाभ उठाकर आप अच्छी खासी टैक्स बचत कर सकते हैं।
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि नई टैक्स व्यवस्था में अधिकांश डिडक्शन का लाभ नहीं मिलता। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले दोनों टैक्स व्यवस्थाओं की तुलना करना जरूरी है, ताकि यह तय किया जा सके कि किस विकल्प में आपको अधिक बचत होगी।
यदि आपने पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ), कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट, ईएलएसएस, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी), सुकन्या समृद्धि योजना, जीवन बीमा प्रीमियम, बच्चों की ट्यूशन फीस या होम लोन के मूलधन का भुगतान किया है, तो आप सेक्शन 80सी के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक की टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। यह टैक्स बचाने का सबसे सामान्य तरीका है।
इसके अलावा, यदि आपने नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में निवेश किया है, तो आप सेक्शन 80सीसीडी(1बी) के तहत 50,000 रुपए तक की अतिरिक्त टैक्स छूट प्राप्त कर सकते हैं। यह छूट सेक्शन 80सी से अलग है, जिससे मिलाकर कुल 2 लाख रुपए तक की टैक्स बचत संभव है।
यदि आपने अपने, जीवनसाथी, बच्चों या माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली है, तो आप सेक्शन 80डी के तहत टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं। यह छूट परिवार की स्थिति और वरिष्ठ नागरिकों के आधार पर 25,000 से 1 लाख रुपए तक हो सकती है। ध्यान रहे कि प्रीमियम का भुगतान बैंकिंग माध्यम से किया जाना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, उच्च शिक्षा के लिए लिया गया एजुकेशन लोन भी टैक्स बचाने में सहायक होता है। सेक्शन 80ई के तहत एजुकेशन लोन पर चुकाए गए ब्याज की पूरी राशि पर निर्धारित अवधि तक टैक्स छूट मिलती है, जिसमें कोई अधिकतम सीमा नहीं होती। हालांकि, यह छूट केवल ब्याज पर लागू होती है, लोन के मूलधन पर नहीं।
यदि आपने सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी संस्था, ट्रस्ट या राहत कोष में दान दिया है, तो आप सेक्शन 80जी के तहत 50 प्रतिशत या 100 प्रतिशत तक टैक्स छूट प्राप्त कर सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि दान किस संस्था को दिया गया है। डिडक्शन का दावा करने के लिए दान की रसीद और संबंधित संस्था का पंजीकरण विवरण सुरक्षित रखना आवश्यक है।
यदि आपने घर खरीदने के लिए होम लोन लिया है, तो आप सेक्शन 24(बी) के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपए तक की टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं। ध्यान दें कि यह छूट केवल ब्याज पर मिलती है, जबकि होम लोन का मूलधन सेक्शन 80सी के तहत क्लेम किया जाता है।
रिटर्न दाखिल करने से पहले फॉर्म 16, एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (एआईएस) और फॉर्म 26एएस का मिलान करना न भूलें, ताकि आपकी आय और टैक्स कटौती की जानकारी में कोई अंतर न रहे। जिन डिडक्शन का दावा करना है, उनसे जुड़े सभी दस्तावेज और रसीदें अपने पास रखें। साथ ही, अपनी आय और निवेश के अनुसार सही टैक्स व्यवस्था का चयन करें। बैंक खाते, पैन, आधार और अन्य व्यक्तिगत जानकारी सही दर्ज करें। सबसे महत्वपूर्ण बात, आईटीआर दाखिल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन करना न भूलें, क्योंकि इसके बिना आपकी रिटर्न प्रक्रिया अधूरी मानी जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आयकर रिटर्न भरना केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सही टैक्स योजना का भी हिस्सा है। यदि आप उपलब्ध टैक्स डिडक्शन का सही तरीके से लाभ उठाते हैं और सभी जरूरी दस्तावेजों का मिलान करके रिटर्न दाखिल करते हैं, तो न केवल अतिरिक्त टैक्स देने से बच सकते हैं बल्कि भविष्य में किसी भी तरह की टैक्स संबंधी परेशानी से भी दूर रह सकते हैं।