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आयकर रिटर्न में नए बदलाव: जानें क्या है नया ITR फॉर्म में

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नए नियमों के तहत, करदाताओं को अपने फॉर्म में अधिक जानकारी प्रदान करनी होगी। जानें कि ITR-1, ITR-2, ITR-3 और ITR-4 फॉर्म में क्या बदलाव हुए हैं और अंतिम तिथियों के बारे में क्या जानना आवश्यक है। टैक्स विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, अपने सभी वित्तीय डेटा को सही तरीके से मिलाना बेहद जरूरी है।
 

आयकर रिटर्न में महत्वपूर्ण परिवर्तन


वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं के लिए इस वर्ष कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सरकार ने यह कदम टैक्स चोरी को रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने और आपके बैंक, कंपनियों, ब्रोकरों और म्यूचुअल फंड के डेटा को आपके 'वार्षिक सूचना विवरण' से आसानी से मिलाने के लिए उठाया है।


ITR-1 फॉर्म में बदलाव

यदि आपके पास दो संपत्तियाँ हैं और दोनों से किराया प्राप्त होता है, तो आप अब भी ITR-1 फॉर्म का उपयोग कर सकते हैं। पहले, एक से अधिक संपत्तियों के लिए आपको ITR-2 फॉर्म भरना पड़ता था। इसके अलावा, यदि आपको सूचीबद्ध शेयरों या इक्विटी म्यूचुअल फंड से 1.25 लाख रुपये तक का दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ प्राप्त हुआ है, तो आप इसे सीधे ITR-1 में दिखा सकते हैं। नए कॉलम में अब दूसरा पता, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी भरने की सुविधा भी जोड़ी गई है।


ITR-2 फॉर्म में बदलाव

यदि आपने शेयर या संपत्ति बेची है, तो आपको अब उसकी खरीद और बिक्री की तारीख, बिक्री मूल्य और खरीद लागत की पूरी जानकारी देनी होगी। यदि किसी कंपनी ने आपसे अपने शेयर वापस खरीदे हैं और आपको नुकसान हुआ है, तो इसके लिए एक अलग सेक्शन बनाया गया है। भारत के निवासियों के लिए विदेश में संपत्ति या आय की जानकारी देना पहले की तरह आवश्यक है।


ITR-3 फॉर्म में बदलाव

शेयर बाजार में व्यापार करने वालों को अब फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O), इंट्राडे ट्रेडिंग, कमोडिटी ट्रेडिंग और मुद्रा ट्रेडिंग की स्पष्ट जानकारी देनी होगी। इसके अलावा, बड़े लेन-देन और व्यापार से संबंधित अन्य विवरण भी मांगे गए हैं।


ITR-4 फॉर्म में बदलाव

इस फॉर्म में भी आप दो संपत्तियों से होने वाली आय और म्यूचुअल फंड/शेयर से ₹1.25 लाख तक के दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ को दिखा सकते हैं। आपको 31 मार्च 2026 को आपके बैंक खातों में मौजूद बैलेंस की सटीक जानकारी भी देनी होगी। यदि आपने किसी राजनीतिक पार्टी को दान दिया है और उस पर टैक्स छूट प्राप्त करना चाहते हैं, तो आपको उस पार्टी का PAN नंबर भी देना पड़ सकता है।


आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि

सैलरी वाले लोगों के लिए आमतौर पर अंतिम तिथि 31 जुलाई होती है। हालांकि, छोटे व्यापारियों या F&O ट्रेडर्स को जिनके लिए ऑडिट की आवश्यकता नहीं है, वे अब 31 अगस्त तक अपना रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। यदि आपसे कोई गलती हो जाती है, तो लेट फीस के साथ संशोधित रिटर्न दाखिल करने का समय बढ़ाकर मार्च 2027 तक कर दिया गया है।


टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि ITR दाखिल करने से पहले अपने सभी बैंक खातों, निवेश और आय को अपने AIS से मिलाना न भूलें। यदि आपके फॉर्म और AIS के आंकड़ों में कोई अंतर पाया जाता है, तो आयकर विभाग से नोटिस आ सकता है।