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आरबीआई की चेतावनी: पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नियंत्रण आवश्यक

आरबीआई ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त की है, जो देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर भारी बोझ डाल सकती हैं। बैंक ने केंद्र सरकार और तेल कंपनियों को कीमतों को नियंत्रित करने की सलाह दी है। यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो महंगाई में वृद्धि हो सकती है, जिससे उपभोक्ताओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जानें इस मुद्दे पर आरबीआई का क्या कहना है और इसके संभावित दीर्घकालिक प्रभाव क्या हो सकते हैं।
 

महंगाई पर असर डाल सकती हैं बढ़ती कीमतें


आरबीआई ने दी चेतावनी


पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का सबसे अधिक प्रभाव कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति पर पड़ा है। कच्चे तेल की कमी के कारण कंपनियों को इसे महंगे दाम पर आयात करना पड़ रहा है, जिससे लागत में वृद्धि हो रही है। इस स्थिति के चलते कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति बैठक में इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की गई।


आरबीआई की सलाह

आरबीआई ने केंद्र सरकार और तेल कंपनियों को कीमतों को नियंत्रित करने की सलाह दी है। बैंक का कहना है कि बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतें आम जनता पर भारी बोझ डाल सकती हैं। इसके अलावा, हाल की बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा, जिससे खुदरा महंगाई में 0.36 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।


दीर्घकालिक प्रभाव

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मई से अब तक पेट्रोल की कीमतों में 7.4 प्रतिशत और डीजल की कीमतों में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी प्रभाव डालेगी। जब पेट्रोल और डीजल महंगे होते हैं, तो परिवहन लागत बढ़ जाती है, जिससे फल, सब्जियां, अनाज, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ जाती हैं।


आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव

आरबीआई का मानना है कि महंगे ऊर्जा उत्पाद और आपूर्ति में रुकावटें आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, घरेलू मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है और मैन्युफैक्चरिंग तथा सर्विस सेक्टर में विकास जारी है। लेकिन यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो महंगाई और बढ़ सकती है, जिससे आम लोगों का खर्च बढ़ेगा और आर्थिक विकास की गति पर भी असर पड़ेगा।