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आरबीआई की नीतिगत दर में वृद्धि: महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता की दिशा में कदम

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की है, जिसका उद्देश्य महंगाई को नियंत्रित करना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम घरेलू मांग और कर्ज प्रवाह को बनाए रखने में मदद करेगा। इस लेख में जानें कि कैसे यह निर्णय कर्जदारों और छोटे व्यवसायों पर प्रभाव डालेगा, और भविष्य में नीतिगत दरों में और वृद्धि की संभावना क्या है।
 

आरबीआई की नई नीतिगत दर

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर: बैंक अधिकारियों और विशेषज्ञों ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा नीतिगत दर में वृद्धि का निर्णय महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में सहायक होगा। मजबूत घरेलू मांग और कर्ज प्रवाह के चलते आर्थिक वृद्धि की गति बनाए रखने की उम्मीद है। आरबीआई ने बुधवार को प्रमुख नीतिगत ब्याज दर, जिसे रेपो कहा जाता है, को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। इसके साथ ही, नीतिगत रुख को तटस्थ से बदलकर 'सूझ-बूझ के साथ सख्त' करने का निर्णय लिया गया।


विशेषज्ञों की राय

इंडियन ओवरसीज बैंक के सीईओ अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि रेपो दर में वृद्धि महंगाई के जोखिम को नियंत्रित करने के लिए एक संतुलित और एहतियाती कदम है। उन्होंने यह भी बताया कि मौद्रिक नीति का रुख 'सूझ-बूझ के साथ सख्त' करने का निर्णय महत्वपूर्ण है, जो यह दर्शाता है कि ब्याज दरों में कटौती की संभावना फिलहाल नहीं है।


उन्होंने आगे कहा कि इस वृद्धि का प्रभाव कर्जदारों, विशेषकर आवास ऋण लेने वालों और छोटे व्यवसायों पर पड़ेगा। बैंकों को ऊंची ब्याज दरों को ग्राहकों तक पहुंचाने के साथ-साथ उत्पादक कर्ज की मांग को समर्थन देना जारी रखना होगा।


महंगाई और आर्थिक वृद्धि

केनरा बैंक के सीईओ ब्रजेश कुमार सिंह ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण महंगाई का दबाव बढ़ा है। रेपो दर में वृद्धि का उद्देश्य महंगाई को स्थिर करना और वृहद आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि इस वृद्धि से वित्तपोषण लागत और ब्याज दरों पर असर पड़ेगा, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.1 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है, जो मजबूत आर्थिक वृद्धि और स्वस्थ ऋण मांग को दर्शाता है।


कोटक महिंद्रा बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज ने कहा कि एमपीसी ने उम्मीद के अनुसार रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की है, लेकिन नीतिगत रुख को बदलने का निर्णय अप्रत्याशित था।


भविष्य की संभावनाएं

उमेश रेवणकर, श्रीराम फाइनेंस के कार्यकारी उपाध्यक्ष, ने कहा कि रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि एक कड़ा लेकिन उचित कदम है। महंगाई मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन से जुड़े आपूर्ति पक्ष के दबाव से प्रभावित है।


एचडीएफसी बैंक की प्रमुख अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने कहा कि आरबीआई ने वैश्विक केंद्रीय बैंकों के साथ कदम मिलाते हुए ब्याज दरों में वृद्धि का चक्र शुरू किया है। यह निर्णय घरेलू महंगाई के बढ़ते जोखिम के बीच लिया गया है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ महीनों में आरबीआई नीतिगत दर में 0.50 से 0.75 प्रतिशत तक और वृद्धि कर सकता है।