आरबीआई की मौद्रिक नीति में संभावित बदलाव: दिसंबर में दरों में वृद्धि की संभावना
आरबीआई की मौद्रिक नीति में बदलाव
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने मौद्रिक नीति रुख को तटस्थ से सख्त करने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक दिसंबर में होने वाली नीतिगत समीक्षा में रेपो दर में 0.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है। अगली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा 4 दिसंबर को आयोजित की जाएगी। इससे पहले, आरबीआई ने अपनी प्रमुख नीतिगत दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है।
मुद्रास्फीति और दरों में वृद्धि
यह बढ़ोतरी लगभग चार वर्षों में पहली बार हुई है। केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि बढ़ती मुद्रास्फीति और कमजोर रुपये के कारण आगे भी दरों में वृद्धि की संभावना है। एचडीएफसी बैंक की प्रमुख अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने कहा कि अगले कुछ महीनों में दरों में कुल मिलाकर 0.50 से 0.75 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा सकती है।
आर्थिक कारक और भविष्य की संभावनाएं
अधिक आक्रामक दर वृद्धि का जोखिम इस बात पर निर्भर करेगा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि कब तक जारी रहती है। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने बताया कि कमजोर मानसून और बढ़ती जिंस कीमतों के कारण मुद्रास्फीति के आंकड़े बढ़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि खाद्य और ईंधन की मौजूदा मुद्रास्फीति ने आरबीआई पर दबाव डाला है।
विशेषज्ञों की राय
रिसर्जेंट इंडिया के प्रबंध निदेशक ज्योति प्रकाश गडिया ने कहा कि अगले दो तिमाहियों में दरों में और वृद्धि हो सकती है। यस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील पान ने भी कहा कि दिसंबर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी अब निश्चित मानी जा रही है। क्रिसिल की प्रधान अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने हाल के महीनों में खुदरा मुद्रास्फीति में वृद्धि और कच्चे तेल, जिंसों और खाद्य कीमतों से जुड़े जोखिमों की ओर इशारा किया।
भविष्य की दिशा
पीडब्ल्यूसी इंडिया के भागीदार रानेन बनर्जी ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति द्वारा रेपो दर में बढ़ोतरी की व्यापक उम्मीद थी। भविष्य के कदम अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख, वैश्विक बॉण्ड प्रतिफल की चाल, खाद्य मुद्रास्फीति की दिशा और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेंगे।