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आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक: ब्याज दरों में स्थिरता की संभावना

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में तनाव के चलते ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। बैठक के परिणामों की घोषणा शुक्रवार को की जाएगी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, खासकर यदि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं। इस बैठक में आर्थिक वृद्धि और महंगाई के अनुमान पर भी चर्चा की जाएगी, जो आने वाले समय में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
 

आरबीआई की बैठक का आगाज

नई दिल्ली – भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते केंद्रीय बैंक इस बार ब्याज दरों में कोई परिवर्तन नहीं करेगा। बैठक के परिणामों की घोषणा आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को करेंगे।


वैश्विक आर्थिक परिदृश्य

जून की मौद्रिक नीति समीक्षा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। इससे आर्थिक परिदृश्य और जटिल हो गया है।


ब्याज दरों की स्थिरता

हालांकि, अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है, लेकिन वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए उसके बयान का रुख पहले से अधिक सतर्क हो सकता है। एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, निकट भविष्य में आरबीआई ब्याज दरों को स्थिर रखने की नीति अपना सकता है, लेकिन समय के साथ सख्ती की संभावना भी है।


महंगाई का अनुमान

भंडारी ने कहा कि बाजार 2026 की चौथी तिमाही में ब्याज दरों में लगभग दो बार कटौती की संभावना देख रहा है। यदि तेल की कीमतों का अनुमान बढ़ता है, तो महंगाई का अनुमान भी 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। केयरएज रेटिंग्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सामान्य से कम मानसून और ईंधन की खुदरा कीमतों में वृद्धि के कारण महंगाई का दबाव बढ़ा है।


आर्थिक वृद्धि का पूर्वानुमान

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि थोक महंगाई में वृद्धि का असर खुदरा महंगाई पर अपेक्षा से अधिक तेजी से पड़ सकता है। केयरएज रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, बशर्ते कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल रहे।


भविष्य की चुनौतियाँ

हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच जाती हैं, तो आर्थिक वृद्धि दर घटकर लगभग 6 प्रतिशत रह सकती है। एसबीआई रिसर्च का भी मानना है कि महंगाई के लगातार बने जोखिमों को देखते हुए आरबीआई रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करेगा।


ब्याज दरों में स्थिरता की संभावना

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने भी ब्याज दरों में यथास्थिति बनाए रखने का अनुमान जताया है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि हाल में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई नरमी और बाहरी आर्थिक स्थिति में सुधार से आरबीआई को राहत मिली है। यदि तेल की कीमतें और कम होती हैं और भू-राजनीतिक तनाव घटता है, तो इससे रुपए को मजबूती मिलेगी और आरबीआई को लंबे समय तक ब्याज दरें स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।