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आरबीआई की वित्तीय सफलता: एक साल में 4 लाख करोड़ रुपये की कमाई

आरबीआई ने 2025-26 में 4 लाख करोड़ रुपये की कमाई की है, जिसमें नोटों की छपाई पर खर्च कम होने का बड़ा योगदान है। जानें कि कैसे यह बैंक अपने निवेश और विदेशी मुद्रा के लेनदेन से लाभ अर्जित करता है। इस लेख में आरबीआई के खर्च और आय का विस्तृत विवरण दिया गया है, जो इसकी वित्तीय सफलता को दर्शाता है।
 

आरबीआई की भूमिका और कमाई का स्रोत

जब भी आप किसी नोट को देखते हैं, उस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का नाम लिखा होता है। यह बैंक देश में नोटों की छपाई का कार्य करता है। RBI का कार्य केवल नोट छापना नहीं है, बल्कि यह बैंकों को लोन देना, नियम बनाना और मौद्रिक नीति निर्धारित करना भी शामिल है। हाल ही में, RBI ने एक साल में 4 लाख करोड़ रुपये की कमाई की है। दिलचस्प बात यह है कि नोटों की छपाई पर केवल 6 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए, जिससे अधिकांश धन बच गया।


आरबीआई का कार्यप्रणाली

आरबीआई, बैंकों का बैंक है, जहां देश के बैंक अपने पैसे जमा करते हैं और लोन लेते हैं। इसके अलावा, RBI का कार्य नोटों की छपाई, मनी सप्लाई को बनाए रखना और बैंकों की गतिविधियों पर नजर रखना है। RBI विभिन्न निवेशों के माध्यम से भी आय अर्जित करता है और यह धन अन्य बैंकों को लोन के रूप में प्रदान करता है।


आरबीआई के खर्च और आय का विवरण

2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय मुद्रा में निवेश से RBI को 1,17,740 करोड़ रुपये की आय हुई। विदेशी मुद्रा में निवेश से 27,407 करोड़ रुपये की आय हुई। कुल मिलाकर, विदेशी मुद्रा के लेनदेन से RBI ने 1,68,906 करोड़ रुपये कमाए, जिससे कुल आय 4,27,684 करोड़ रुपये हुई। खर्च की बात करें तो नोट छापने पर 4,875 करोड़ रुपये और कर्मचारियों की सैलरी पर 10,136 करोड़ रुपये खर्च हुए।


आरबीआई की बढ़ती कमाई

2025-26 में RBI की कमाई में 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के कारण RBI ने विदेशी मुद्रा की बिक्री की, जिससे उसे लाभ हुआ। पिछले वर्ष की तुलना में विदेशी मुद्रा के लेनदेन से होने वाली आय में 52 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।