आरबीआई के नए कदमों से रुपये की गिरावट पर लगाम लगाने की उम्मीद
आरबीआई के उपायों का प्रभाव
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रुपये में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों से निकट भविष्य में रुपये की गिरावट का दबाव कम हो सकता है। यह उपाय बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त नकदी निकालने में भी सहायक हो सकते हैं। विभिन्न शोध रिपोर्टों में इस बात का उल्लेख किया गया है। इन उपायों में तेल विपणन कंपनियों के लिए विशेष बैंकों के माध्यम से डॉलर की उपलब्धता और विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव से बचाव के लिए कुछ सौदों की लागत बढ़ाना शामिल है।
डॉलर की मांग पर नियंत्रण
इन कदमों से हाजिर बाजार में डॉलर की मांग और रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने की संभावना है। कोटक महिंद्रा बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रुपये पर इसका तात्कालिक प्रभाव सकारात्मक रहने की उम्मीद है। डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर 95 से नीचे जाने की संभावना को नकारा नहीं किया जा सकता।
वायदा प्रीमियम में संभावित कमी
तेल विपणन कंपनियों और अन्य आयातकों द्वारा बचाव के सौदों पर अंकुश लगने से वायदा प्रीमियम में नरमी आ सकती है। हालांकि, बैंक ने चेतावनी दी है कि वैश्विक परिस्थितियां अभी भी अनिश्चित बनी हुई हैं। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा कि इन कदमों से निकट भविष्य में डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर और वायदा प्रीमियम में कमी आने की उम्मीद है।
आरबीआई के नए नियम
आरबीआई ने 10 अक्टूबर को जारी परिपत्रों के माध्यम से अधिकृत डीलरों को रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों को रद्द करने के बाद पुनः बुक करने की अनुमति देने से रोक दिया है। हालांकि, मौजूदा नियमों के तहत परिपक्वता पर ऐसे सौदों को आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है। केंद्रीय बैंक ने अंतर्निहित जोखिम के बिना विदेशी मुद्रा वायदा सौदों की सीमा को 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दिया है।
विदेशी मुद्रा जोखिम आरक्षित निधि
यह सीमा अधिकृत डीलरों और मान्यता प्राप्त शेयर बाजारों दोनों पर लागू होगी। आरबीआई ने विदेशी मुद्रा जोखिम आरक्षित निधि (एफईआरआर) भी शुरू की है, जिसके तहत अधिकृत डीलरों को दो लाख डॉलर से अधिक के प्रत्येक रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा वायदा सौदे की सांकेतिक राशि के रुपये में मूल्य के 20 प्रतिशत के बराबर रकम नकद में आरबीआई के पास रखनी होगी।
बाजार में अनुशासन का उद्देश्य
यह प्रावधान उन सौदों पर लागू होगा, जो चालू खाते से जुड़े जोखिम से बचाव के लिए रुपये के बदले विदेशी मुद्रा खरीदने के उद्देश्य से किए जाते हैं। आरबीआई ने कहा है कि इन कदमों का उद्देश्य बाजार में अनुशासन को मजबूत करना और जोखिम का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना है, ताकि विदेशी मुद्रा बाजार व्यवस्थित और पारदर्शी बना रहे।