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आरबीआई के नए कदमों से विदेशी निवेश में वृद्धि की संभावना

आरबीआई के हालिया निर्णयों से भारत में विदेशी निवेश में वृद्धि की संभावना जताई जा रही है, जिससे रुपये को मजबूती मिल सकती है। केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय बाजार में लगभग 50 अरब डॉलर का विदेशी फंड आ सकता है। हालांकि, महंगाई अभी भी एक चुनौती बनी हुई है, और आरबीआई ने इसके अनुमान को बढ़ा दिया है।
 

मुंबई में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने वाले आरबीआई के निर्णय


मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हालिया निर्णयों से देश में विदेशी निवेश में वृद्धि की संभावना है, जिससे भारतीय रुपये को भी मजबूती मिल सकती है। केंद्रीय बैंक ने अपनी नवीनतम नीति में ब्याज दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया है, लेकिन विदेशी निवेश को आकर्षित करने और वित्तीय बाजार को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। यह निर्णय आर्थिक विकास को गति देने और महंगाई पर नियंत्रण रखने के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है।


रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा है। वैश्विक आर्थिक स्थिति, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को देखते हुए समिति ने अपना रुख तटस्थ रखा है।


हालांकि आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन विदेशी मुद्रा को आकर्षित करने के लिए कई विशेष सुविधाएं प्रदान की हैं। इनमें सरकारी कंपनियों के लिए विदेशी कर्ज जुटाने की प्रक्रिया को सरल बनाना, विदेशी मुद्रा प्रवासी डिपॉजिट को प्रोत्साहित करना और अप्रवासी भारतीयों तथा विदेशी निवेशकों के लिए निवेश के रास्ते को आसान बनाना शामिल है।


विशेषज्ञों की राय

'आईसीआईसीआई बैंक ग्लोबल मार्केट्स' के विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए उपायों से भारत में लगभग 50 अरब डॉलर का विदेशी फंड आ सकता है, जिससे बैंकों की नकदी में वृद्धि होगी और रुपये को समर्थन मिलेगा।


आरबीआई ने 'फुल्ली एक्सेसिबल रूट' (FAR) का दायरा बढ़ा दिया है, जिससे विदेशी निवेशक भारतीय सरकारी बॉंड में अधिक निवेश कर सकेंगे। हाल ही में सरकार द्वारा दी गई टैक्स छूट और इस कदम के बाद भारत के ग्लोबल बॉंड इंडेक्स में शामिल होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि ऐसा होता है, तो भारत के डेट मार्केट में 25 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश आ सकता है। कुल मिलाकर, लगभग 75 अरब डॉलर का लाभ होने की उम्मीद है।


महंगाई का अनुमान बढ़ा

इस घोषणा के बाद बाजारों में सकारात्मक रुझान देखने को मिला और रुपये ने अपनी पुरानी कमजोरी से उबरने में सफलता पाई। हालांकि, महंगाई अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के प्रभाव के कारण देश की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है।


बैंकिंग क्षेत्र ने इस निर्णय का स्वागत किया है, क्योंकि स्थिर ब्याज दरें व्यवसायियों को विश्वास प्रदान करती हैं। बाजार को उम्मीद है कि यदि महंगाई बढ़ती है, तो आरबीआई ब्याज दरों में वृद्धि करने से पीछे नहीं हटेगा।