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आरबीआई के नए कदमों से विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने की उम्मीद

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई नए कदम उठाए हैं, जिससे 75 अरब डॉलर का निवेश आने की संभावना जताई जा रही है। इस लेख में, हम जानेंगे कि कैसे आरबीआई के सुधारों से भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक विकास को गति देने के लिए क्या विचार किए हैं। जानें पूरी जानकारी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

रिजर्व बैंक के सुधारों से 75 अरब डॉलर का निवेश आने की संभावना


रिजर्व बैंक के निवेश संबंधी सुधारों के बाद देश में 75 अरब डॉलर निवेश आने की उम्मीद


Foreign Investors (बिजनेस डेस्क) : पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और पिछले कुछ महीनों से विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पूंजी निकासी के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। इस स्थिति से उबरने और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई नए कदम उठाए गए हैं। आरबीआई ने विदेशी निवेशकों पर लगाए गए कई अतिरिक्त शुल्क हटाने का निर्णय लिया है।


इससे यह उम्मीद की जा रही है कि विदेशी निवेशकों का उत्साह फिर से बढ़ेगा और वे भारतीय बाजार में पुनः निवेश करेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की हालिया नीतियों और निवेश संबंधी सुधारों के चलते भारत में 75 अरब डॉलर तक की विदेशी पूंजी आने की संभावना है। एसबीआई रिसर्च और कोटक सिक्योरिटीज की रिपोर्टों में कहा गया है कि इन सुधारों से विदेशी निवेश में वृद्धि होगी, रुपये की स्थिति मजबूत होगी और सरकारी उधारी की लागत में कमी आएगी.


आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत की

एसबीआई का अनुमान है कि आरबीआई के उपायों से कम से कम 40 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है, जबकि कोटक सिक्योरिटीज ने 50 से 75 अरब डॉलर तक पूंजी प्रवाह की संभावना जताई है। दोनों संस्थानों का मानना है कि अगस्त में मौद्रिक नीति समिति रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रख सकती है।


आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत लगाया है, जो पहले 6.9 प्रतिशत था। केंद्रीय बैंक ने इसके लिए कमजोर वैश्विक मांग, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और अल नीनो से जुड़े जोखिमों को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है।


पीएम मोदी ने किया आर्थिक विकास पर मंथन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल के बीच आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्यों के साथ भारत की आर्थिक वृद्धि को गति देने के उपायों पर चर्चा की। इस बैठक में मुख्य रूप से उन रणनीतियों पर विचार किया गया, जो भारत को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भी तेजी से आगे बढ़ने में मदद कर सकती हैं।


अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल नीतियों का निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर सुधार भी आवश्यक है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए विभिन्न सुझावों और नीतिगत कदमों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही जीवन की सुगमता और कारोबार की सुगमता को बेहतर बनाने से जुड़े सुधारों पर भी विचार किया गया।


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